भागलपुर में एनडीए की नींव हिली! बगावत बना बवंडर, चार सीटों पर “बागी ब्रिगेड” का कब्ज़ा?
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। भागलपुर से पटना तक गूंज रहा है एक ही सवाल – एनडीए में ये आग लगी कैसे? कहानी नहीं, ये हकीकत है! एनडीए के गढ़ माने जाने वाले भागलपुर ज़िले में अब हर सीट पर अपने ही मोर्चा खोल चुके हैं। जो कल तक मंच पर साथ थे, आज मैदान में आमने-सामने हैं।
रोहित पांडे के नाम की घोषणा के साथ ही भागलपुर भाजपा में भौकाल की गूंज शुरू हो गई। यहां से बड़े बड़े चेहरे टिकट की रेस में थे। भाजपा के अर्जित चौबे और प्रशांत विक्रम पहले ही बिगुल बजा चुके थे। अब प्रीति शेखर ने भी निर्दलीय बनकर रण में उतरने की तैयारी पूरी कर ली है। टिकट नहीं मिला? कोई बात नहीं! मैदान से हटने का इरादा नहीं! अब हालत ये है कि एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवार रोहित पांडेय को अपने ही तीन पूर्व साथियों से दो-दो हाथ करने होंगे। रोहित के खिलाफ यही तीन नहीं और भी नाम गुमसुम हो रणनीति बनाने में जुटे हैं। जो भूमिगत होकर पार्टी यानी रोहित के खिलाफ बवाल करने का मन बना चुके हैं।
लोजपा (रामविलास) ने मिथुन यादव को मैदान में उतारा, लेकिन अमर कुशवाहा और विजय यादव ने ये फ़ैसला ज़रा भी नहीं पचा। अब दोनों के निर्दलीय उतरने की चर्चा ज़ोर पकड़ रही है। अगर ऐसा हुआ, तो नाथनगर की सीट एनडीए के हाथ से खिसक सकती है। या फिर इस विस्फोट को बड़े चेहरे के जरिए फुस्स करना पड़ेगा। जिसका आसार दूर – दूर तक फ़िलहाल दिखाई नहीं पड रहा। कहलगांव से पवन यादव तो गुस्से में अन्य ठिकाने की खोज भी शुरू कर दिया है। उनके समर्थक इस आग में घी डालने से गुरेज नहीं कर रहा है। सोशल मीडिया एक्स पर इसके समर्थक भविष्य के प्लान को खुलेआम चस्पा कर रहे हैं। गोपालपुर से बाहुबली कहे जाने वाले गोपाल मंडल पार्टी के खिलाफ खड़े हो चुके हैं। उन्हें आशंका है कि मेरा टिकट कट चुका है। ये वही नेता हैं जो वर्षों से अपने अजीबो-गरीब बयान और अंदाज के कारण चर्चा में शुमार रहे हैं। आफत का अंदाजा लगते ही गोपाल मंडल मुख्यमंत्री आवास के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी कर आए। फ़िलहाल काम बनता दिख नहीं रहा है। पार्टी के पोस्टर बॉय रहे लेकिन इस बार उनका रुख बाग़ियों वाला है।
पीरपैंती सीट पर भी एनडीए से नाम की घोषणा के साथ ही विस्फोट होना तय है। यहां भी मौजूदा भाजपा विधायक के खिलाफ बिगुल बज चुका है। सभी अमन चैन की बात करते देखे जा रहे हैं। लिफाफा खुलने के बाद यानी चेहरा स्पष्ट होते ही यहां बग़ावत तय है।
एनडीए में बगावत नहीं, अब बगावत का ब्लास्ट हो चुका है!
पार्टी नेतृत्व के फ़रमान अब असर खो चुके हैं। हाईकमान के निर्देश अब नेताओं के लिए सिफ़ारिश जैसे लगने लगे हैं। और जनता? वो तो बाग़ियों के तेवरों में कुछ नया देख रही है। शायद बदलाव की आहट! अब बड़ा सवाल – एनडीए इस आग को बुझाएगा या बागी ब्रिगेड ही नया राजनीतिक नक्शा बनाएगी?
भागलपुर ज़िले की चार अहम सीटें भागलपुर, नाथनगर, कहलगांव और गोपालपुर। अब एनडीए के लिए सेफ ज़ोन नहीं रहीं। इस बार का चुनाव दिलचस्प है, गरम है, और हर दांव पर एक ही बात तय है। मुकाबला होगा तगड़ा!



