पटना बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे की अनदेखी, मंच पर नहीं मिली कुर्सी

प्रदीप विद्रोही

पटना। भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे को अब पार्टी अपने बड़े और छोटे कार्यक्रमों में भी खास तवज्जो नहीं दे रही है। बक्सर लोकसभा से टिकट कटने के बाद अंग प्रदेश के इस अक्खड़ नेता को पार्टी ने दरकिनार करने का मन बना लिया है। कुछ ऐसा ही नजारा पटना में आयोजित भाजपा कार्यसमिति की बैठक में देखने को मिला, जब अश्विनी चौबे को मंच पर बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली। यह मामला अंग सहित प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया एक्स पर भी इस प्रकरण की खूब चर्चा हो रही है। हालांकि, अश्विनी चौबे ने इस बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह केवल नेताओं से मिलने आए थे और फिर अन्य कार्यक्रम में जा रहे थे।

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पटना के ज्ञान भवन में बुधवार को भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की एक अहम बैठक चल रही थी। इस बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। इसमें पार्टी के करीब 900 नेता, विधायक, मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी और विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष शामिल हुए।

इस बैठक में जब अश्विनी चौबे मंच पर पहुंचे तो उनके लिए कुर्सी की कोई व्यवस्था नहीं थी। बताया जा रहा है कि वह मंच पर चढ़े, लेकिन जब उन्हें बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली तो वे बिना कुछ कहे मंच से घूमकर बाहर निकल गए। उन्होंने इस घटना को तूल न देते हुए कहा, मैं केवल नेताओं से मिलने और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने आया था। मंच पर जगह न मिलने की बात गलत है। मैंने स्वेच्छा से बैठक में हिस्सा लिया और अपने काम से निकल गया। इसी बीच यह भी खबर है कि अश्विनी चौबे को पटना के BIA में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होना था, इसलिए वे बैठक से पहले ही निकल गए। हालांकि, उनके चेहरे पर उपेक्षा का भाव साफ दिखाई दे रहा था।

भागलपुर विधानसभा से चार बार विधायक और बक्सर लोकसभा सीट से एक बार सांसद रह चुके अश्विनी चौबे का राजनीतिक ग्राफ पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद से नीचे की ओर है। इस बीच, उन्होंने भागलपुर सदर सीट से अपने बेटे अर्जित शाश्वत चौबे को टिकट दिलवाया, लेकिन जीत नहीं दिला सके। दूसरी बार भी चौबे के अथक प्रयासों के बावजूद भाजपा ने अर्जित को टिकट नहीं दिया और उसकी जगह नए चेहरे रोहित पांडे को मौका दिया, जिन्हें भी हार का सामना करना पड़ा।

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