बजट पूर्व संगोष्ठी में बोले वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर,केंद्र सरकार बिहार की तरह झारखंड की महिलाओं को भी दे 10 हजार रुपये
रांची: झारखंड सरकार द्वारा प्रोजेक्ट भवन में आयोजित दो दिवसीय बजट पूर्व संगोष्ठी का समापन शुक्रवार को हुआ। इस संगोष्ठी में सभी विभागों के बजट प्रस्तावों पर गहन मंथन हुआ, साथ ही राज्य के संसाधनों को बढ़ाने और 2026-27 के बजट को जनोन्मुखी बनाने पर व्यापक चर्चा की गई। संगोष्ठी के अंतिम सत्र में विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने-अपने सुझाव और विचार रखे।
मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्ष 2026-27 झारखंड का “रजत वर्ष” है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सपना है कि यह रजत बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला बने। उन्होंने कहा कि बजट का लक्ष्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार प्रति व्यक्ति पांच किलो अनाज देती है, लेकिन इसमें पोषक तत्वों की कमी है। यदि इसमें दाल, अंडा और मिलेट को शामिल किया जाए तो लोगों को प्रोटीन मिलेगा। इस दिशा में विचार चल रहा है, हालांकि इसके लिए राज्य में उत्पादन बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।
केंद्र सरकार पर झारखंड के बकाए की राशि रोकने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में तय लक्ष्य के मुकाबले राज्य को भारी नुकसान हुआ है। मनरेगा, जीएसटी सहित विभिन्न मदों में हजारों करोड़ रुपये झारखंड को नहीं मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य अब केवल केंद्र पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अपने आंतरिक राजस्व स्रोतों को बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।
वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि झारखंड सरकार केंद्र सरकार को एक पत्र भेजेगी, जिसमें मांग की जाएगी कि बिहार की तर्ज पर झारखंड की महिलाओं को भी 10 हजार रुपये की सहायता दी जाए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के नए अवसर सृजित करे।



