26 साल बाद भी बिरसा मुंडा के गांव उलिहातु की नहीं बदली तस्वीर, अधूरे आवास और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीण
रांची: झारखंड अलग राज्य बने 26 साल होने को हैं। एक बार फिर स्थापना दिवस मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन आदिवासियों के महानायक भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु आज भी विकास की बाट जोह रही है। गांव में सरकारी योजनाओं के दावों के बावजूद बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं। कहीं आवास अधूरे हैं, तो कहीं बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही है। आंगनबाड़ी केंद्र के पास अपना भवन तक नहीं है।
गांव के ग्रामीण सिमोन सरकारी आवास योजना की राशि मिलने के बावजूद अधूरे मकान में रहने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि आवास निर्माण के लिए निर्धारित राशि का केवल आधा हिस्सा ही मिला, जबकि शेष राशि ठेकेदार ने हड़प ली। नतीजतन उन्हें पुराने मिट्टी के मकान की छत बांस से तैयार करनी पड़ रही है।
वहीं, 83 वर्षीय याकूब मुंडा आज भी खेती के लिए लकड़ी का हल तैयार करते हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से पेंशन बंद है। उनका आरोप है कि बड़े-बड़े अधिकारी गांव आते हैं, भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं और तस्वीरें खिंचवाकर चले जाते हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान नहीं होता।
गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति भी चिंताजनक है। केंद्र का अपना भवन नहीं होने के कारण पिछले पांच वर्षों से इसका संचालन सेविका के निजी मकान में किया जा रहा है। भवन निर्माण के लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
खूंटी जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि मिश्रा ने कहा कि उलिहातु में कांग्रेस शासनकाल में विकास के कई कार्य हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने माना कि गांव में अभी काफी विकास की जरूरत है। सड़क और आंगनबाड़ी भवन निर्माण की योजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं और जल्द ही धरातल पर उतरेंगी।
मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण साबू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली के विकास के लिए अरबों रुपये की योजनाएं बनीं, लेकिन उनका लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंचा। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक यहां आ चुके हैं, लेकिन गांव की तस्वीर नहीं बदली।
राजनीतिक नेता दिलीप मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को बड़े-बड़े नेता उलिहातु पहुंचते हैं। भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और विकास के वादे कर लौट जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेडियम, पुस्तकालय और सड़क निर्माण के लिए रैयतों की जमीन ली गई, लेकिन पुस्तकालय में आज भी पुस्तकें नहीं हैं। पानी के लिए बोरिंग कराई गई, लेकिन उससे पानी नहीं मिल रहा है।
उलिहातु की बदहाली सरकारी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे व्यंग्य में कहते हैं कि अब गांव के विकास के लिए अमेरिका से ट्रंप को ही आना पड़ेगा, तभी शायद उनकी तस्वीर बदलेगी।



