बूंदों का कहर: पांच करोड़ ईंटें मिट्टी में, भट्ठा मालिकों पर टूटा करोड़ों का संकट,आम लोगों पर भी असर

भागलपुर। जिले में बेमौसम बारिश ने खेतों में तैयार गेंहू, मक्का और दलहन की फसलों और आम व लीची को भी नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ईंट उद्योग की भी कमर तोड़ दी है। घोघा-आमापुर से लेकर सबौर-शंकरपुर तक एनएच-80 और गंगा तट के किनारे फैले ईंट भट्ठों पर आसमान से गिरी बूंदें किसी आपदा से कम साबित नहीं हुईं। जहां कभी धुएं के साथ रोजगार की उम्मीदें उठती थीं, वहीं अब चारों ओर भीगी और बर्बाद ईंटों का मंजर पसरा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में कुल 177 ईंट भट्ठे हैं, जिनमें से गंगा तट स्थित लगभग 60 भट्ठे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ईंट भट्ठा निर्माता संघ के अनुसार, हर भट्ठे में करीब 6 से 7 लाख कच्ची ईंटें खुले आसमान के नीचे पकने के लिए तैयार थीं। लेकिन अचानक हुई बूंदाबांदी ने इन अधपकी ईंटों को मिट्टी में तब्दील कर दिया।करोड़ों का नुकसान, दोहरी मार:
अनुमान है कि इस बारिश से करीब 5 करोड़ कच्ची ईंटें बर्बाद हो गई हैं। एक भट्ठा मालिक को न केवल बर्बाद ईंटों को हटाने में, बल्कि फिर से निर्माण करने में भी 7 से 8 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। अगर सिर्फ प्रभावित 60 भट्ठों की बात करें, तो यह नुकसान करीब 4.5 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। वहीं, पुनर्निर्माण में भी लगभग इतनी ही राशि खर्च होगी। यानी कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ ईंट भट्ठा मालिक पर इस अप्रत्याशित व बेमौसम बारिश ने डाल दिया है।

आम लोगों पर भी पड़ेगा असर:
इस नुकसान का असर सिर्फ भट्ठा मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल ईंटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका सीधा असर घर बनाने वाले आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें महंगी ईंट खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा।

उम्मीदों पर पानी:
भट्ठा मालिकों के लिए यह मौसम कमाई का समय होता है, लेकिन इस बार बारिश ने उनकी मेहनत और उम्मीदों दोनों को बहा दिया। अब वे दोबारा उत्पादन शुरू करने की चुनौती और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। कुल मिलाकर, यह बेमौसम बारिश सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक झटका बनकर सामने आई है, जिसकी मार उद्योग से लेकर आम जनता तक महसूस की जाएगी।

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