वृहत झारखंड कला संस्कृति मंच द्वारा रांची राजधानी में डहरे सोहराय ऐतिहासिक
गणादेश,रांची :रांची राजधानी में डहरे सोहराय वृहत झारखंड कला संस्कृति मंच के बैनर तले आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कुड़मी समाज की ओर से आयोजित किया गया था। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रांची आसपास के गांव से हजारों की संख्या में महिला और पुरुष अपने पारंपरिक पोशाक और वाद्य यंत्रों के साथ मोराबादी मैदान में एकत्रित हुई और जुलूस के रूप में जयपाल सिंह स्टेडियम तक नाचते गाते पहुंची। देखते ही देखते भीड़ की हुजूम बढ़ने लगी। दहरे सोहराय झारखंड प्रदेश में मनाए जाने वाली सोहराय परब के पूर्व आयोजित की गई। वहीं शीतल ओहदार ने कहा कि हमारे समाज में सोहराय पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। अपनी कला संस्कृति का प्रदर्शन किया गया है। डहरे सोहराय के माध्यम से रांची के बीचों बीच हजारों संख्या में महिला पुरुष आज उपस्थित हुए हैं। आने वाले दिनों में भी पूरे परेदेश में दहारे सोहराय मनाया जाएगा। यह 12 मासे 13 परब है,यह आदिवासी-कुरमी दोनों मिलकर मानते हैं। ज्ञात हो कि सोहराय परब झारखंड का एक मूल परब है और सभी झारखंडी किसान वर्ग के लोग धान के अच्छी उपज होने की संभावना पर इसे हर्ष उल्लास के साथ मानते हैं। किंतु यह परब अब बाहरी पर्वों के अतिक्रमण का शिकार हो रही है। इसीलिए इस सोहराय परब को सुरक्षित और संरक्षित रखने के उद्देश्य से बृहद झारखंड कला संस्कृति मंच के बैनर तले शहर के रांची राजधानी के बीचो-बीच जयपाल सिंह स्टेडियम में डहरे सोहराय का आयोजन किया गया। जहां सोहराय परब के सभी परंपराएं निभाई गई जिसके अंतर्गत चावल के आटा से चौंक (रंगोली) बनाई गई , पुवा बनाकर गोहाल पूजा की परंपरा भी निभाई गई। इस आयोजन में अनगड़ा, ओरमांझी, कांके, नगड़ी और नामकुम सहित प्रदेश के अन्य जिलों से लाखों लोगों का समर्थन मिला।



