झारखंड के नगड़ी में अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर रिम्स-2 के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है..
रांची : राजधानी रांची के नगड़ी बनने जा रही अत्याधुनिक ट्रॉमा यूनिट यानी रिम्स-2 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ सरकार इस प्रोजेक्ट को राज्य की बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धि बता रही है,वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण अपनी जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।लेकिन, इस प्रोजेक्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिन किसानों और रैयतों की जमीन ली जा रही है, उनका कहना है कि मुआवजा बेहद कम है और पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार उनकी उपजाऊ जमीन छीन रही है, जबकि वे इसी पर निर्भर हैं।
स्थानीय रैयत मण्डल मुर्मू ने कहा कि हम लोग खेती करके परिवार चलाते हैं। अगर यही जमीन छिन जाएगी, तो हम कहां जाएंगे? सरकार हमको उचित मुआवजा और पुनर्वास दे तब ही हम मानेंगे।”
हेमंत सोरेन की सरकार राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से रिम्स-2 प्रोजेक्ट में 110 एकड़ जमीन पर 1074 करोड़ रुपये की लागत से 700 बेड वाले एक नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना करना चाहती है। वहीं विपक्ष स्थानीय रैयतों के साथ इस प्रोजेक्ट पर अड़ंगा लगाने से पीछे नहीं हट रही है। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार रिम्स-2 जहां पर निर्माण कराना चाहती है वह रैयती और भूमिहरी जमीन है। साथ ही यह जमीन काफी उपजाऊ है। यहाँ के रैयात यदि यह जमीन दे देंगे तो वे लोग कहां जाएंगे। राज्य सरकार को रिम्स-2 दूसरी बंजर और सरकारी जमीन पर निर्माण काराना चाहिए। इसके अलावा विपक्ष का कहना है कि राजधानी रांची में रिम्स की क्या हालात है यह किसी से छुपी नहीं है। राज्य सरकार पहले इसे दुरुस्त करे। रांची के सांसद सह केंद्रीय राज्यमंत्री संजय सेठ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी व पूर्व सीएम चंपई सोरेन ने किसानों के पक्ष में “परियोजना को दूसरी, बंजर जमीन पर शिफ्ट करने” की मांग की। उन्होंने टो इस जमीन पर बीते 24 अगस्त को हल चलाने की घोषणा किया था। लेकिन, चंपई सोरेन को इससे पहले ही हाउस अरेस्ट किया गया, उनका कहना है मुद्दा परियोजना-विरोध नहीं बल्कि “आदिवासी जमीन बचाने” का है। यही नहीं यह मुद्दा अब विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठा और भाजपा ने इसपर सदन में हंगामा भी किया है।
इस परियोजना के निर्माण को लेकर कुछ विवाद भी हैं, जिनमें जमीन अधिग्रहण और स्थानीय लोगों की आपत्तियां शामिल हैं।
रिम्स-2 प्रोजेक्ट क्या है :
रांची के बरियातू स्थित रिम्स का दूसरा विस्तार रिम्स-2 प्रोजेक्ट है। हेमंत सोरेन की सरकार नगड़ी में एक नया मेडिकल कॉलेज की स्थापना करना चाहती है। इसी प्रोजेक्ट का नाम रिम्स-2 दिया गया है। लेकिन इसके जमीन अधिग्रहण में ही फिलहाल ग्रहण लग गया है।
राज्य सरकार ने 2025 में इसके निर्माण के लिए नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित साइट को चिन्हित कर आगे की कार्रवाई शुरू की। लेकिन,स्वास्थ्य विभाग जैस ही इस प्रोजेक्ट पर एक कदम बढ़ाती,वहां पर स्थानीय लोगों का विरोध –प्रदर्शन शुरू हो गया। वैसे भी यहां पर भूमि अधिग्रहण करना सबसे बड़ा काम होता है। नगड़ी इलाके में सरकारी “अधिग्रहण बनाम दावेदारी” का इतिहास पुराना है। पूर्व में भी आईआईएम का नैर्मन हो या कुटे बस्ती में नया विधानसभा निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण ,सभी प्रोजेक्ट में राज्य सरकार का पसीना छूटा है। भूमि को लेकर यहां पर ग्रामीण-आदिवासी विरोध दर्ज रहा है। 1957-58 में सरकार ने पास के क्षेत्रों में सार्वजनिक प्रयोजन हेतु भूमि अधिग्रहण का दावा किया था, पर दशकों तक वास्तविक कब्ज़ा अस्पष्ट रहा, जिससे आज भी रैयत अपनी कृषि पर अधिकार जताते हैं।
बहरहाल, राज्य सरकार रिम्स-2 का प्रोजेक्ट फिलहाल अंधेरे में लटकता दिख रहा है,क्योंकि यहां पर भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी समस्या है।



