दुनिया की पहली पेड पीरियड लीव डॉक्यूमेंट्री की राष्ट्रीय स्क्रीनिंग में चमका बिहार का नाम, पूर्व विधायक ललन पासवान हुए सम्मानित

भागलपुर। भारत मंडपम आज एक ऐतिहासिक पहल का गवाह बना, जब यहां दुनिया की पहली पेड पीरियड लीव पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म की राष्ट्रीय स्क्रीनिंग और विशेष सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और उनके कार्यक्षेत्र में अधिकारों को केंद्र में रखकर बनाई गई इस डॉक्यूमेंट्री ने देशभर से आए प्रतिनिधियों और विशिष्ट जनों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का संयोजन रंजीता प्रियदर्शिनी द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को एक सामाजिक आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पूर्व विधायक ललन पासवान को मिला राष्ट्रीय सम्मान
बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती क्षेत्र से पूर्व भाजपा विधायक ललन पासवान को इस अवसर पर विशेष सम्मान से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान इस कारण प्राप्त हुआ कि वे देश के पहले ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिन्होंने पेड पीरियड लीव को संसद या राज्य विधानमंडल स्तर पर उठाए जाने योग्य मुद्दा बताते हुए खुलकर इसका समर्थन किया और आवाज बुलंद की। मालूम हो कि इस आशय से संबंधित पोस्ट पूर्व भाजपा विधायक ललन पासवान ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर मंगलवार को चस्पा किया है। साथ ही कार्यक्रम की कई तस्वीरें भी पोस्ट की है। इस कार्यक्रम के पैनल डिस्कशन में 17 देशों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। विधायक के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए पांच लोगों को भी सम्मानित किया गया।समारोह में उन्हें लोकसभा सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज के करकमलों से सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए पासवान ने कहा कि यह मुद्दा केवल महिलाओं की सुविधा का नहीं, बल्कि उनके अधिकार, स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा प्रश्न है और इसे राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनना चाहिए।महिला स्वास्थ्य व न्यायपूर्ण कार्यसंस्कृति की दिशा में बड़ा कदम
डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग के दौरान वक्ताओं ने यह संदेश दिया कि मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर समाज में अभी भी संवाद की कमी है। पेड पीरियड लीव जैसी नीतियां न केवल महिलाओं के लिए राहतकारी होंगी, बल्कि कार्यस्थलों में एक संवेदनशील और समानता-आधारित माहौल तैयार करने में मदद करेंगी।रंजीता प्रियदर्शिनी ने कार्यक्रम संबोधित करते हुए कहा कि यह अभियान सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलाव का प्रयास है। ऐसा बदलाव जो महिलाओं की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर नीतिगत स्तर पर निर्णय लेने की मांग करता है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि यह पहल जल्द से जल्द अपने मुकाम तक पहुंचे, और इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आने की जरूरत है।सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ता कदम
कार्यक्रम में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भागीदारी दर्ज कराई। उपस्थित जनों ने एक स्वर में कहा कि पेड पीरियड लीव का विचार आधुनिक भारत की जरूरत है और इसे राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनना चाहिए। इस कार्यक्रम के जरिए न केवल एक डॉक्यूमेंट्री को देश के सामने पेश किया गया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया गया कि महिलाओं का स्वास्थ्य कोई निजी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। इस यादगार आयोजन में ललन पासवान का सम्मान बिहार के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण साबित हुआ।

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