बंगाल, असम, पड़ोसी मुल्क नेपाल से कांवरियों का आना शुरू,श्रावणी मेला की तैयारियों की पोल खोल रही अधूरी व्यवस्थाएं

भागलपुर। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की औपचारिक शुरुआत भले ही 11 जुलाई से होनी है, लेकिन इससे पहले ही सुल्तानगंज बाबा धाम जाने वाले कांवरियों से पट गया है। बंगाल, असम और पड़ोसी देश नेपाल से हजारों की संख्या में कांवरिये “बोल बम” के जयकारों के साथ अजगैवीनाथ धाम पहुंच रहे हैं और गंगाजल लेकर देवघर की पदयात्रा पर निकल रहे हैं।श्रद्धालुओं का जनसैलाब जैसे-जैसे सावन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बढ़ता जा रहा है। खासकर कच्ची कांवरिया पथ पर पैदल चलने वाले भक्तों की भीड़ हर दिन लंबी होती जा रही है। परंतु, प्रशासनिक तैयारियों की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं अधूरी, कांवरियों को बाबा का सहारा :
कांवरियों का जत्था हर साल मेला से एक पखवाड़े पूर्व ही पहुंचने लगता है, लेकिन इस बार भी प्रशासन ने पर्याप्त पूर्व तैयारी नहीं की है। शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं अभी भी नदारद हैं। गंगा घाट, स्टेशन परिसर और कांवरिया पथ पर कांवरियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल से आए कांवरियों का कहना है कि भीड़ से बचने के लिए वे सावन शुरू होने से पहले ही आ गए हैं, पर यहां शुद्ध पानी और शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। “कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए थी,” एक श्रद्धालु ने बताया।

रेलमार्ग से भारी भीड़, स्टेशन पर भी नहीं है इंतजाम :
सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर इन दिनों सुबह की ट्रेनों में श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ देखी जा रही है। हावड़ा-जमालपुर, हावड़ा-गया और मुजफ्फरपुर-भागलपुर इंटरसिटी जैसी ट्रेनों में खचाखच भीड़ है। पर स्टेशन पर पर्याप्त संख्या में शौचालय नहीं होने से श्रद्धालु पटरी किनारे शौच को विवश हैं, जिससे किसी भी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

निर्देश के बावजूद कार्य अधूरे, नपुंसक साबित होती व्यवस्थाएं :
जिलाधिकारी द्वारा सभी संबंधित विभागों को 30 जून तक काम पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया था, जिसे बाद में 3 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। लेकिन स्थिति जस की तस है। पीएचईडी विभाग द्वारा रंग-रोगन तो करवा दिया गया है, पर शौचालयों में दरवाजे, कमोड, सीट आदि अब तक नहीं लगाए जा सके हैं। प्याऊ की हालत भी संतोषजनक नहीं है।

कच्ची कांवरिया पथ पर चापाकलों के सहारे श्रद्धालु प्यास बुझा रहे हैं। वहीं, सड़क निर्माण कार्य के कारण अपर रोड और थाना रोड पर जाम की स्थिति बनी हुई है। एक सप्ताह शेष रहने के बावजूद नाला निर्माण और सड़क चौड़ीकरण कार्य अधूरा है, जिससे मेला के दौरान भीड़ को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

श्रद्धा से सराबोर, व्यवस्था से लाचार :
श्रावणी मेला की पवित्रता और श्रद्धा को प्रशासनिक लापरवाही ने कहीं न कहीं प्रभावित किया है। कांवरियों की आस्था अडिग है, पर व्यवस्था की रीढ़ कमजोर दिख रही है। ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन हरकत में आए और कम से कम मूलभूत सुविधाओं को तात्कालिक रूप से ही सही, सुलभ कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

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