सीएम के ऐलान के बाद 1975 चयनित कर्मियों की नौकरी पर संकट, भारी बारिश में प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक ऐलान के बाद झारखंड में सीजीएल परीक्षा के माध्यम से चयनित 1975 कर्मियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। नौकरी रद्द किए जाने की घोषणा के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में चयनित कर्मी भारी बारिश के बीच प्रोजेक्ट भवन के बाहर जुटे और सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
दरअसल, जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की मांगों पर सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें सीजीएल परीक्षा को रद्द करने के साथ ही टीडीपीएल के माध्यम से हुई सभी भर्तियों को रद्द करने की बात शामिल है। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद अब सीजीएल के जरिए चयनित और विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 1975 कर्मियों के सामने नौकरी जाने का संकट पैदा हो गया है।
सरकार के फैसले से नाराज चयनित कर्मियों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन मेहनत और अपनी प्रतिभा के आधार पर चयनित होकर नौकरी कर रहे कर्मियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने कहा कि अगर किसी ने फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की है तो सरकार उसकी जांच कर कार्रवाई करे, लेकिन बिना जांच किए सभी चयनित कर्मियों की नौकरी रद्द करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच करा सकती है। जांच में यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति गलत पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कर्मियों ने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और नौकरी बचाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल की है। ऐसे में एक परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण उनकी नौकरी छीनना उनके भविष्य के साथ अन्याय होगा। भारी बारिश के बावजूद कर्मी प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहे और सरकार से तत्काल समाधान की मांग करते रहे।


