भागलपुर स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़, चौथे दिन भी अफरातफरी, रेल परिचालन व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। गंगा नदी के कटाव के कारण महाराजपुर स्टेशन के पास रेल पटरी प्रभावित होने के बाद भागलपुर–साहिबगंज और साहिबगंज – रामपुरहाट रेलखंड पर ट्रेन परिचालन प्रभावित है। लगातार कई घंटों के अंतराल के बाद ट्रेन चलाए जाने के कारण भागलपुर स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
यात्रियों का कहना है कि महाराजपुर के पास रेल पटरी प्रभावित होने के बावजूद प्रभावित हिस्से को छोड़कर सुरक्षित रेल लाइन पर सीमित अथवा वैकल्पिक परिचालन की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि यदि स्टेशन पर खाली रैक उपलब्ध हैं, तो ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट और शॉर्ट ओरिजिनेट कर सुरक्षित हिस्से में चलाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।
यात्रियों ने बर्धमान – साहिबगंज MEMU पैसेंजर के परिचालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि प्रभावित रेलखंड के कारण पूरी यात्रा संभव नहीं है, तो ट्रेन को सुरक्षित हिस्से तक, जैसे तीनपहाड़, शॉर्ट टर्मिनेट अथवा शॉर्ट ओरिजिनेट करके चलाने की संभावना देखी जा सकती है।
इसी तरह क्षेत्र की महत्वपूर्ण वनांचल एक्सप्रेस के परिचालन को लेकर भी यात्रियों ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई है। फिलहाल ट्रेन का परिचालन दुमका होकर किए जाने की जानकारी सामने आई है। यात्रियों का कहना है कि यदि रेलवे की ओर से अप लाइन पर गति नियंत्रण के साथ कुछ ट्रेनों को चलाया जा रहा है, तो प्रभावित हिस्से को छोड़कर सुरक्षित रेल लाइन के माध्यम से भागलपुर से रांची के बीच परिचालन की तकनीकी संभावना का भी आकलन किया जाना चाहिए।
साहिबगंज – रामपुरहाट के यात्री भी परेशान:
साहिबगंज – रामपुरहाट रेलखंड पर पिछले कई दिनों से परिचालन प्रभावित रहने के कारण हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों की मांग है कि उपलब्ध सुरक्षित रेल लाइन और संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए कम से कम सीमित संख्या में ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की संभावनाओं पर रेलवे विचार करे।
यात्रियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में वैकल्पिक परिचालन व्यवस्था से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी वैकल्पिक परिचालन का निर्णय रेलवे द्वारा ट्रैक की वास्तविक स्थिति, सुरक्षा मानकों, परिचालन क्षमता और तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन करने के बाद ही लिया जा सकता है।
लगातार चौथे दिन यात्रियों की परेशानी के बीच अब क्षेत्र के लोगों की मांग है कि रेलवे प्रभावित रेलखंड में उपलब्ध सुरक्षित विकल्पों की समीक्षा करे और यात्रियों की सुविधा के लिए व्यावहारिक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए।


