नये आयकर अधिनियम के सरलीकरण होगा सबको लाभ: डाॅ सुधाकर राव

पटना । आयकर विभाग बिहार व झारखंड की ओर से ‘प्रारंभ-2026‘ नामक मेगा आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन बिहार चैंबर्स ऑफ कामर्स सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एक अप्रैल 2026 से लागू आयकर अधिनियम 2025 के प्रमुख प्रावधानों  व बदलावों के प्रति लोगों के बीच जागरूकता व सूचित चर्चा को बढ़ावा देना था। यह कार्यक्रम विभाग की करदाता-केंद्रित पहल का हिस्सा था। इसके तहत करदाताओं व विभिन्न हितधारकों को नए कानून के तहत किए गए सुधारों और सरल प्रक्रियाओं से अवगत कराया गया। उद्घाटन मुख्य आयकर आयुक्त डाॅ. डी. सुधाकर राव, पद्मश्री डाॅ विजय प्रकाश, पद्मश्री डाॅ. भीम सिंह भवेश  व पद्मश्री सुधा वर्गिज द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया गया। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डाॅ. राव ने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए आयकर अधिनियम को सरलीकरण किया गया है। पहले एक ही विषय से जुड़े प्रावधान अलग-अलग बिखरे थे। जिन्हें अब एक जगह समाहित कर दिया गया है। उन्होंने पारदर्शी प्रशासन, हितधारकों की भागीदारी और नए कर कानून के सुचारु क्रियान्वयन के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई। पद्मश्री डाॅ. भीम सिंह भवेश ने कहा कि कहा कि बिहार-झारखंड की बडी़ आबादी के बावजूद देश के कुल आयकर में यहां की भागीदारी एक प्रतिशत भी नहीं है, जबकि महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत है। आयकर विभाग को एक प्रतिस्पर्धा करानी चाहिए और इसमें प्रत्येक जिला व राज्य से अधिक टैक्स जमा करने वाले को सम्मानित किया जाना चाहिए। पद्मश्री डा. सुधा वर्गीज ने कहा कि गरीब केवल लाभार्थी नहीं बनेंगे, वह भी कंट्रीब्यूटर बनना चाहते है। इसके लिए आयकर विभाग को आगे आने की जरूरत है। पद्मश्री डा. विजय प्रकाश ने कहा कि आयकर के नये प्रावधान के तहत आयकर देना आसान, सरल और सहज हो गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर और फीडबैक सत्र भी हुआ। इसमें प्रतिभागियों ने नए आयकर कानून और आयकर नियम 2026 के क्रियान्वयन से जुड़े सुझाव और व्यावहारिक समस्याएं साझा की। कार्यक्रम में सीआइएमपी के निदेशक प्रो. राणा सिंह, चैंबर के अध्यक्ष पीके अग्रवाल, बीआइए अध्यक्ष रामलाल खेतान, शिक्षाविद, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी संस्थानों, व्यापार एवं उद्योग संगठनों, टैक्स पेशेवरों तथा शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
    बदलते आर्थिक परिदृश्य में आयकर अधिकर अधिनियम का सरलीकरण-झा
पूर्व आयकर आयुक्त अशोक झा ने कहा कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में आयकर अधिकर अधिनियम का सरलीकरण किया गया है। पहले एक ही तथ्य कई जगह टुकड़े में था। अब सभी को एक जगह कर दिया गया है। इससे समझने में काफी आसानी होगी। अब एक क्षेत्र को एक जगह कर दिया गया है। अब फार्म 16 की जगह फार्म 130 और फार्म 16ए की जगह फार्म 131 हो गया है। फार्म 130 हर वर्ष 15 जून तक जारी किया जाएगा। टीडीएस के कई फार्म को मर्ज कर इसे सेक्शन 392 कर दिया गया है। फार्म 393 में रेंट, कांक्ट्राक्टर, प्रोफेशनल, प्रोपर्टी एवं नन रेजीडेंट के लिए कर दिया गया है। भारतीय नागरिकों के लिए फार्म 93 कर दिया गया है। फार्म 94 इंडियन कंपनिज, एलएलपीज, ट्रस्ट आदि के लिए है। फार्म 95 एनआरआइ, फारेन पीआइओ एवं ओसीआइ के लिए है। फार्म 96 वैसे संस्थाओं के लिए है जो देश के बाहर निगमित है।

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