केंद्रीय धूमकुड़िया परिसर में बहुउद्देशीय भवन का शिलान्यास, आदिवासी समाज को मिलेगा नया सांस्कृतिक केंद्र

रांची: राजधानी रांची स्थित केंद्रीय धूमकुड़िया परिसर में सोमवार को जी प्लस-2 बहुउद्देशीय भवन निर्माण कार्य का शिलान्यास झारखंड सरकार के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक सीपी सिंह, रांची की मेयर रोशनी खलखो, उपमहापौर नीरज कुमार, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, केंद्रीय धूमकुड़िया के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक सीपी सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस भवन का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कल्याण विभाग की योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू करना चाहिए ताकि समाज के लोगों को सीधा लाभ मिल सके।
मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि यह भवन समाज को नई दिशा देने का काम करेगा। यहां सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन से युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण से ही आदिवासी समाज का समग्र विकास संभव है। उन्होंने बताया कि लगभग 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बनने वाला यह तीन मंजिला भवन रांची में आदिवासी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। भवन के भूतल में सांस्कृतिक एवं संगीत गतिविधियों की व्यवस्था होगी, प्रथम तल पर कोचिंग क्लास संचालित होंगे, जबकि दूसरे तल पर पुस्तकालय बनाया जाएगा।
इस दौरान जगलाल पाहन ने सरना स्थल, अखड़ा और हरगड़ी जैसे पारंपरिक धार्मिक स्थलों पर बढ़ते अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इनके संरक्षण और चहारदीवारी निर्माण की मांग की। कार्यक्रम में सुनील टोप्पो, सूरज टोप्पो, अभिभूत कुमार, कैलाश मुंडा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।




झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

रांची: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए जमानत दे दी है। आलमगीर आलम को प्रवर्तन निदेशालय ने 15 मई 2024 को टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था. यह कार्रवाई उनके करीबियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में 32.20 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद होने के बाद हुई थी.ज्ञात हो कि झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल की जमानत याचिका खारिज कर चुका था, जिसके बाद से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की ओर से कहा गया कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है. न ही उनके यहां से किसी तरह के कोई पैसे बरामद हुए थे. ऐसे में उन्हें राहत मिलनी चाहिए. इसके अलावा पूर्व मंत्री के अधिवक्ताओं ने उनकी बीमारी का भी हवाला देते हुए को जमानत की गुहार लगाई.जबकि ईडी की ओर से पेश होने वाले अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को भी टेंडर आवंटन के बाद कमीशन का पैसा मिलता था. उनके पीएस संजीव लाल के यहां से मिली डायरी में यह लिखा गया था कि मंत्री को भी कमीशन का पैसा दिया जाता है. ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती है.आलमगीर आलम की जमानत मामले में इससे पहले 2 अप्रैल को भी सुनवाई हुई थी, जिसमें जांच एजेंसी ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में अभी चार महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं, ऐसे में अभियुक्तों को रिहा करना उचित नहीं होगा. ईडी ने कोर्ट के समक्ष यह आशंका भी जताई थी कि यदि इन आरोपियों को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वे बाहर निकलकर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. हालांकि, इन तमाम विरोधों के बावजूद अदालत ने अब उन्हें जमानत की राहत प्रदान कर दी है।

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