21 मार्च को निकलेगी भव्य सरहुल शोभा यात्रा, केंद्रीय सरना समिति की बैठक में तैयारियों पर मंथन
रांची : प्रकृति पर्व सरहुल को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में सोमवार को कचहरी चौक स्थित कार्यालय में केन्द्रीय सरना समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष फुलचंद तिर्की ने की। बैठक में सरहुल शोभा यात्रा को भव्य, आकर्षक और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए फुलचंद तिर्की ने बताया कि इस वर्ष राजधानी रांची में 21 मार्च को भव्य सरहुल शोभा यात्रा निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि सरहुल आदिवासी समाज का सबसे बड़ा प्रकृति पर्व है, जिसे पूरे उत्साह, परंपरा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इसकी तैयारियां राज्य के सभी सरना स्थलों में शुरू कर दी गई हैं।
उन्होंने बताया कि 20 मार्च को द्वितीया तिथि के दिन पारंपरिक रूप से मछली और केकड़ा पकड़ने की रस्म निभाई जाती है। इस दौरान गांव के लोग नदी, तालाब और खेतों के किनारे जाकर यह परंपरा निभाते हैं। वहीं पाहन द्वारा घड़े में पानी रखकर अगले दिन मौसम और फसल को लेकर पारंपरिक भविष्यवाणी की जाती है। इस दिन गांव के पुरुष जंगल जाकर फूल-पत्ते लाते हैं, जबकि महिलाएं घरों की साफ-सफाई कर पूजा की तैयारी करती हैं।
21 मार्च को तृतीया तिथि की सुबह ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-गाते सरना स्थल पहुंचेंगे, जहां पाहन द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सरहुल पूजा संपन्न कराई जाएगी। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे से बड़ी संख्या में लोग सरहुल शोभा यात्रा में शामिल होंगे। वहीं 22 मार्च को पाहन घर-घर जाकर लोगों को फूल प्रसाद वितरित करेंगे।
समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि सरहुल के अवसर पर राजधानी रांची को दुल्हन की तरह सजाया जाए। साथ ही सभी शहीद स्थलों पर स्थापित प्रतिमाओं की साफ-सफाई और रंग-रोगन कराया जाए। शोभा यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराने, जगह-जगह पेयजल, बिजली, चना, गुड़, केला सहित अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
समिति के सदस्यों ने बताया कि रांची की सरहुल शोभा यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। पिछले 55 वर्षों से इस शोभा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के संदेश के साथ आकर्षक झांकियां निकाली जाएंगी, जो आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करेंगी।
बैठक में समिति के सदस्य एंजल लकड़ा और लक्ष्मी मुंडा सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।



