विद्यानगर शिव हनुमान मंदिर का प्रथम स्थापना दिवस संपन्न, 1101 हनुमान चालीसा पाठ और विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

गणादेश,रांची : झारखंड की राजधानी रांची के विद्यानगर स्थित शिव हनुमान मंदिर का प्रथम स्थापना दिवस अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष महावीर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 8 बजे से वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई, जिसमें पंडित रवि शास्त्री के निर्देशन में मंत्रोच्चार, अनुष्ठान और हवन-पूजन संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी देवी-देवताओं का वैदिक मंत्रों के साथ आवाहन किया गया। इसके बाद भगवान भोलेनाथ का विधिपूर्वक रुद्राभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक किया गया, जिससे पूरा मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। इसके पश्चात हनुमान जी की विशेष आराधना की गई। हनुमान भक्तों ने 1101 बार हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया, जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने पूरे मनोयोग से भाग लिया।

दिन भर मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालु पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ भगवान शिव और हनुमान की महिमा का गुणगान करते रहे। शाम तक पूरा विद्यानगर क्षेत्र धर्ममय और उत्सवी रंग में रंगा नजर आया।

स्थापना दिवस के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे में शुद्ध और सात्विक भोजन परोसा गया, जिसे श्रद्धालुओं ने प्रसाद रूप में ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

गौरतलब है कि इस भव्य आयोजन की शुरुआत एक दिन पूर्व निकाली गई ऐतिहासिक कलश यात्रा से हुई थी। कलश यात्रा में 1000 से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर भाग लिया। गंगा नगर स्थित नदी से पवित्र जल लेकर महिलाएं नगर भ्रमण करती हुई मंदिर परिसर तक पहुंचीं। रास्ते भर ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और ‘जय श्री राम’ व ‘जय हनुमान’ के नारों से वातावरण गूंजता रहा। इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री महावीर सिंह ने सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिव हनुमान मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और सेवा भाव का केंद्र है। भविष्य में भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे, जिससे समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक चेतना बनी रहे।

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