आदिवासी नेता पहड़ा राजा सोमा मुंडा की श्रद्धांजलि सभा 12 को जियरप्पा, खूंटी में — आगे की रणनीति पर होगा विचार

गणादेश.खूँटी : झारखंड के खूंटी में आदिवासी समाज के बड़े चेहरे और पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या को 72 घंटे से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस इस जघन्य हत्याकांड में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल रही है। हालांकि जांच में सुस्ती के आरोप में एसपी मनीष टोप्पो ने खूंटी थाना प्रभारी को हटाकर लाइन हाजिर कर दिया है, बावजूद इसके पुलिस को अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है। हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश पनप रहा है।

इसी क्रम में 12 जनवरी को खूंटी के जियरप्पा में स्वर्गीय सोमा मुंडा की स्मृति में एक विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इसमें खूंटी, रांची सहित पूरे राज्य से आदिवासी समाज के लोग और कई बड़े नेता शामिल होंगे। सभी स्व. सोमा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

रविवार को खूंटी में आदिवासी समाज की हुई बैठक में इस कार्यक्रम का निर्णय लिया गया। बैठक का नेतृत्व मार्शल बराला ने किया। उन्होंने कहा कि हमारे मार्गदर्शक पहड़ा राजा सोमा मुंडा आज हमारे बीच नहीं हैं और अब तक उनके हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया जा सका है, जिससे समाज बेहद दुखी और आक्रोशित है। उन्होंने कहा कि 12 जनवरी को एक विशाल श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी और इसके बाद आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी।
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फुलचंद तिर्की ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने वाले सोमा मुंडा की निर्मम हत्या कर दी गई। सोमा मुंडा का प्रभाव केवल खूंटी तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में था। आज निश्चित रूप से उनकी कमी खल रही है। उनके हत्यारे अब तक खुले घूम रहे हैं, जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि 12 जनवरी को हजारों की संख्या में लोग श्रद्धांजलि सभा में जुटेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
वहीं भारत आदिवासी पार्टी की नेत्री कुंदरसी मुंडा ने कहा कि अब तक सोमा मुंडा के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की नाकामी है। उन्होंने कहा कि श्रद्धांजलि सभा के बाद झारखंड बंद जैसे बड़े निर्णय पर भी विचार किया जाएगा। सोमा मुंडा झारखंड आंदोलनकारी थे और खूंटी क्षेत्र के पहड़ा राजा थे। आदिवासी समाज में पहड़ा राजा का विशेष महत्व होता है और उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे में यह अत्यंत दुखद है कि अब तक उनके हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *