उपायुक्त ने जनता दरबार में दिखाई संवेदनशीलता,भीक्षाटन दिव्यांग युवक को मिला प्रशासन का संबलजाहिर
बोकारो – चास प्रखंड के सियालगजरा निवासी दिव्यांग जाहिर अंसारी उस वक्त भावुक हो उठे, जब उनकी वर्षों की पीड़ा को सुनने वाला कोई मिला। अपनी वृद्ध मां और तीन मासूम बच्चों के साथ जाहिर जनता दरबार (हम आपको सुनते हैं…) में पहुंचे थे। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए हैं। ऊपर से पत्नी की असमय मृत्यु ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया। हालात ऐसे बन गए थे कि परिवार का पेट पालने के लिए जाहिर को अपने बच्चों के साथ भीक्षाटन का सहारा लेना पड़ रहा था।
दिव्यांग जाहिर समाहरणालय परिसर स्थित उपायुक्त के पोर्टिकों के समीप अपने मां बच्चों के साथ बैठा था। उपायुक्त अजय नाथ झा ने वाहन से उतरने के साथ ही पूरी संवेदनशीलता और धैर्य के साथ जाहिर की पूरी बात सुनी। उनकी परिस्थितियों को समझते हुए उन्होंने इसे केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया और संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।उपायुक्त के निर्देश पर जाहिर को सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा श्री पियूष द्वारा तत्काल कंबल दिया गया। उन्हें दिव्यांग पेंशन भुगतान हो रहा है। उनके दो बच्चों को फोस्टर केयर योजना के अंतर्गत प्रति माह 4-4 हजार रुपये की सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया, ताकि बच्चों की पढ़ाई और परवरिश प्रभावित नहीं हो। उपायुक्त ने बच्चों के आवासीय विद्यालय में नामांकन को लेकर भी जिला शिक्षा अधीक्षक को जरूरी दिशा निर्देश दिया।परिवार को भावनात्मक और सामाजिक संबल देने के उद्देश्य से जाहिर और उनके बच्चों को एक स्वयंसेवी संस्था के साथ टैग किया गया, जो नियमित रूप से उनकी देखभाल और आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करेगी। इसके साथ ही परिवार को राशन की उपलब्धता भी जिला आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा तत्काल सुनिश्चित कराई गई। वहीं, सीएसआर नोडल पदाधिकारी शक्ति कुमार को ई-ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।जाहिर की गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए उपायुक्त ने सिविल सर्जन एवं सदर अस्पताल उपाधीक्षक डा. एन पी सिंह को संपूर्ण मेडिकल चेकअप कराने का निर्देश दिया, ताकि उनके इलाज, पुनर्वास और भविष्य की चिकित्सकीय जरूरतों की उचित योजना बनाई जा सके।
मौके पर उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि प्रशासन का कर्तव्य है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। कोई भी व्यक्ति मजबूरी में भीख मांगने को विवश नहीं हो, इसके लिए प्रशासन हर संभव सहायता करेगा।



