एमआईसी हिंदी परीक्षा में अव्यवस्था, छात्रों का भविष्य दांव पर,गलत प्रश्न पत्र से मचा हड़कंप, छात्र राजद का जोरदार विरोध, आंदोलन की चेतावनी

भागलपुर। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित एम.आई.सी. (हिंदी) की परीक्षा उस समय विवादों में घिर गई, जब परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को सिलेबस से अलग और गलत प्रश्न पत्र थमा दिया गया। इस गंभीर चूक ने न सिर्फ परीक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि सैकड़ों छात्रों के भविष्य पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

परीक्षा कक्ष में बैठे छात्र जब प्रश्न पत्र देखने लगे, तो उनमें अफरा-तफरी मच गई। कई प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर थे, जिससे परीक्षार्थी असमंजस और मानसिक दबाव में आ गए। छात्रों का कहना है कि महीनों की तैयारी के बाद इस तरह की लापरवाही ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।

मामले को लेकर छात्र राजद ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टी.एन.बी. कॉलेज के अध्यक्ष देव सूरज, छात्र राजद के कार्यकर्ता आनंद राज, ऋषभ सहित अन्य छात्रों ने एक स्वर में इसे ‘सिर्फ गलती नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़’ बताया।

देव सूरज ने कहा कि विश्वविद्यालय की इस लापरवाही से छात्रों का समय, पैसा और मानसिक संतुलन—तीनों को नुकसान पहुंचा । यह व्यवस्था की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो छात्र सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कई छात्र ग्रामीण इलाकों और अन्य जिलों से भागलपुर पहुंचे। किसी ने बस-ट्रेन का किराया चुकाया, तो किसी ने रहने और खाने पर खर्च किया। परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर ब उन्हें गलत प्रश्न पत्र मिला, तो उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं।

छात्रों ने बताया कि वे परीक्षा ठीक से नहीं दे पाए, जिससे उनके परिणाम और भविष्य को लेकर गहरी चिंता पैदा हो गई है। कई छात्र मानसिक तनाव में आ गए और परीक्षा हॉल में ही विरोध जताने लगे।

ज्ञापन सौंपकर उठाई चार सूत्री मांग

छात्र राजद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चार प्रमुख मांगें रखी हैं – एम.आई.सी. (हिंदी) की संबंधित परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए। सही और सिलेबस अनुरूप प्रश्न पत्र के साथ पुनः परीक्षा आयोजित की जाए। छात्रों को आने-जाने, ठहरने और अन्य खर्चों से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की जाए।इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

छात्र राजद ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो छात्र संगठन उग्र आंदोलन करेगा। यह मामला अब सिर्फ एक परीक्षा की गलती नहीं रह गया है, बल्कि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की आवाज़ को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले लेता है।

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