शराब घोटाला जांच पर बाबूलाल मारांडी का सवाल, आईएएस अधिकारी विनय चौबे के साथ सीएम हेमंत सोरेन हैं शामिल
गणादेश,रांची : शराब घोटाला की जांच एसीबी कर रही है और इसमें मुख्य अभियुक्त निलंबित आईएएस विनय चोबे के साथ कई आईएएस से पूछताछ चल रही है। इस मामले में सभी का बयान दर्ज करवाया जा रहा है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरंडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बड़ा आरोप लगाया है। प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में उन्होंने शराब घोटाले में आईएएस अधिकारी विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल होने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि एसीबी जांच में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे जेल में बंद हैं। एसीबी जांच में उत्पाद आयुक्तों अमित कुमार, कर्ण सत्यार्थी,फैज अहमद से हो रही पूछताछ में लगभग एक जैसे बयान मीडिया में छप रहे हैं। अमित कुमार ने कहा कि जो विनय चौबे ने चाहा वही हुआ, कर्ण सत्यार्थी ने कहा है कि विनय चौबे ने मामले में केस दर्ज करने से मना किया था। श्री मरांडी ने कहा कि ऐसे बयान कोई सामान्य नहीं बल्कि बड़े और गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता हुआ बयान है। उन्होंने कहा कि एसीबी के द्वारा इस प्रकार चल रही पूछताछ बड़े लोगों को बचाने की सुनियोजित साजिश है। जिनके बयान की चर्चा हुई वे सभी आईएएस अधिकारी हैं। इनको यदि सचिव दबाव डालकर नियम विरुद्ध काम करा रहे थे फाइल में नोटिंग करते,मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायत करते कि गलत हो रहा है,उनपर अनुचित दबाव डाला जा रहा है,शराब के ठेके में चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए कहा जा रहा है।
कहा कि यहां पर यह स्वाभाविक सवाल खड़ा होता है,और उन्होंने कहा कि जांच का नया विषय भी बनता है,इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इनलोगों ने फाइल में अनुचित दबाव का नोटिंग क्यों नहीं किया, सीएस,सीएम से मिलकर क्यों शिकायत नहीं की? और अगर किया तो फिर क्या उत्तर मिला। इन लोगों के बयान से यही झलक रहा कि ये रटे रटाए तोते की तरह बोल रहे।इन लोगों को अदालत में भी ऐसा ही बोलने का निर्देश है।क्योंकि बड़े लोगों को बचाना है।
कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को संभावित शराब घोटाले को लेकर वर्ष 2022 में ही पत्र लिखकर आगाह किया था।लेकिन सीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की।इससे स्पष्ट है कि विनय चौबे के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी घोटाले में शामिल हैं। और सीएम को बचाने की कवायद सरकारी ऑफिसर कर रहे।
इस मामले में एसीबी वाले जांच की नौटंकी कर रहे।एसीबी डीजीपी पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप हैं। फिर इनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद पाक साफ हैं तो पूरे मामले को सीबीआई को सौंप दें।श्री मरांडी ने कहा कि जिन पूर्व आयुक्तों से पूछताछ हुई है वे सभी आज जिलों में उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित हैं।
उन्होंने कहा कि सवाल यह उठता है कि जो पदाधिकारी दबाव में काम करते हैं,भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं,कार्यपालिका नियमावली का पालन नहीं करते फिर वे उपायुक्त के रूप में कितना ईमानदारी से काम करेंगे। इनकी पोस्टिंग और इनके बयान में तो तालमेल नहीं बैठता।एक तरफ ऐसे पदाधिकारी दबाव में काम करते हैं,नियम विरुद्ध काम करते हैं,दूसरी ओर इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेवारी भी सौंपी गई है। ऐसे लोगों को तो हटाया जाना चाहिए।



