भागलपुर के चार सूरमाओं शिवानी, अंबिका ने लहराया गोल्ड, ऋतु और अंकुश को मिला सिल्वर मेडल

भागलपुर। ज़मीन मिट्टी की, स्कूल सरकारी। ट्रेनिंग खेतों के किनारे और सपने ? बिलकुल असली। नेशनल कॉम्बैट कुश्ती चैम्पियनशिप 2025 में जब गोरखपुर के मसकरा सहजनवा इंडोर स्टेडियम में दांव-पेंच चले, तो बिहार के कोने से आए भागलपुर के चार सूरमाओं ने मैट पर अपना परचम लहरा दिया।कहलगांव प्रखंड के रानीपुर लघरीया गांव की शिवानी कुमारी ने जूनियर वर्ग के 52 किलो भार में गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि असली दम अखाड़े में दिखती है, न कि वातानुकूलित सुविधाओं में। 10वीं कक्षा की छात्रा शिवानी की जीत ने गांव को जश्न में डुबो दिया है।इसी गांव के अंकुश कुमार यादव (50 किलो भार वर्ग) और पास के सिंया गांव की ऋतु कुमारी (50 किलो भार वर्ग) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल झटके। ये दोनों भी ग्रामीण स्कूल के छात्र हैं – कोई कोचिंग नहीं, कोई स्पॉन्सर नहीं, सिर्फ हौसला और पसीना।

इन खिलाड़ियों को कुश्ती की पहली समझ देने वाले फिजिकल टीचर अंबिका मंडल खुद भी अखाड़े में उतरे और सीनियर वर्ग के 80 किलो भार में गोल्ड मेडल जीतकर गुरु-शिष्य की परंपरा को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

चार खिलाड़ी, चार मेडल — और एक ही संदेश: “गांव अब भी ताकतवर है” इस नेशनल चैम्पियनशिप में बिहार से 66 खिलाड़ी पहुंचे थे, लेकिन भागलपुर से केवल चार, और वे चारों मेडल लेकर लौटे। यह आंकड़ा ही बताता है कि टैलेंट कहां पनप रहा है। इनकी सफलता सिर्फ खेल की जीत नहीं, यह गांवों में छिपी प्रतिभा, सरकारी स्कूलों की जिजीविषा, और स्थानीय प्रशिक्षकों की तपस्या का प्रमाण है।

गांव से आए हीरो

शिवानी कुमारी – गोल्ड, जूनियर (52 KG)

ऋतु कुमारी – सिल्वर, जूनियर (50 KG)

अंकुश यादव – सिल्वर, जूनियर (50 KG)

अंबिका मंडल – गोल्ड, सीनियर (80 KG)

शब्दों से नहीं, बाजुओं से दिया जवाब

इन सभी खिलाड़ियों की एक साझा कहानी है – कम संसाधन, ज़्यादा संघर्ष और असीमित जुनून।

आज वे न केवल अपने गांव बल्कि पूरे अंग क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि गांव के बच्चों में टैलेंट है या नहीं… सवाल यह है कि क्या हम उन्हें उड़ने के लिए पंख देने को तैयार हैं?

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