बटेश्वर की धरती के गर्भ में छिपा खजाना: पहाड़ियों में मिला एल्युमिनियम लेटराइट, जल्द शुरू होगा उत्खनन

भागलपुर। उत्तरवाहिनी गंगा तट की तराई में स्थित बशिष्ठेश्वर नाथ (बाबा बटेश्वरना महादेव की महिमा अपार है। यह बशिष्ठ मुनि द्वारा आराधित शिवलिंग है। यह शिशु स्वरूप हैं। इन पहाड़ियों पर मौजूद मिट्टी में एल्युमिनियम लेटराइट के ख़ज़ाना की पुष्टि हुई है। यहां इस खनिज पदार्थ के भंडार की संभावना जताई जा रही है। बटेश्वर पहाड़ी की मिट्टी में मिले लेटराइट में लोहा और एल्युमिनियम के संकेत मिलने के बाद खान मंत्रालय ने पूरी पहाड़ी को क्रिटिकल एंड स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक में शामिल कर लिया है। बताया जा रहा है कि अब खान मंत्रालय यहां उत्खनन कराएगा।

इस बाबत बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग के निदेशक से रिपोर्ट मांगी गई थी। निदेशक ने जिले से रिपोर्ट मांगी, जो भेज दी गई है। इस पहाड़ी में तीन खंड (ब्लॉक) हैं। कहलगांव अंचल के आठ मौजों में यह पहाड़ी स्थित है। यह ब्लॉक बटेश्वर स्थान–कासड़ी–जगरनाथपुर कहलाता है। इस ब्लॉक की मैपिंग GPS को-ऑर्डिनेट के आधार पर अंचल अमीन द्वारा कराई गई थी। सीओ की रिपोर्ट भी मंत्रालय को भेजी जा चुकी है।

अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में कितना एल्युमिनियम लेटराइट है और इससे कितना मिलियन टन लोहा या एल्युमिनियम निकाला जा सकता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल मिट्टी पर शोध जारी है।

क्या है एल्युमिनियम लेटराइट ?

एल्युमिनियम लेटराइट एक प्रकार की मिट्टी या चट्टान है जिसमें एल्युमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) की उच्च मात्रा होती है। लेटराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है, और यह एल्युमिनियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

लेटराइट मिट्टी की विशेषताएं:

1. उच्च एल्युमिनियम सामग्री : लेटराइट मिट्टी में एल्युमिनियम ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है, जो इसे एल्युमिनियम का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाती है।

2. लाल या पीली रंग : लेटराइट मिट्टी का रंग आमतौर पर लाल या पीला होता है, जो इसकी उच्च आयरन ऑक्साइड सामग्री के कारण होता है।

3. उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है। लेटराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है, जहां उच्च तापमान और वर्षा के कारण चट्टानों का विखंडन होता है।

एल्युमिनियम लेटराइट का उपयोग:

1. एल्युमिनियम उत्पादन : लेटराइट मिट्टी का उपयोग एल्युमिनियम के उत्पादन में किया जाता है।

2. सीमेंट उत्पादन : लेटराइट मिट्टी का उपयोग सीमेंट के उत्पादन में भी किया जा सकता है।

3. अन्य उद्योगों में : लेटराइट मिट्टी का उपयोग अन्य उद्योगों में भी किया जा सकता है, जैसे कि रिफ्रैक्टरी उद्योग में।

          लेटराइट मुख्य रूप से मिट्टी की एक किस्म होती है, जो हवा के संपर्क में आने पर ठोस चट्टान में बदल जाती है। इसलिए इसका उपयोग निर्माण सामग्री के रूप में किया जाता है। लेटराइट मिट्टी में उर्वरता की कमी होती है, जिससे यह कृषि के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। यह मिट्टी प्रायः लोहा, एल्युमिनियम, टाइटेनियम और मैंगनीज ऑक्साइड से बनी होती है। आयरन से भरपूर किस्मों में हेमेटाइट और गोइथाइट शामिल हैं। ये खनिज मिट्टी या चट्टानों को लाल रंग प्रदान करते हैं।

किस ब्लॉक में कितने खेसरे में मिला एल्युमिनियम लेटराइट ?

1. बटेश्वर स्थान ब्लॉक:

माधोरामपुर मौजा में 66 खेसरे

ओरियप मौजा में 76 खेसरे की पहचान हुई है।

सीओ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ब्लॉक के अंतर्गत स्थल पर पहाड़ है। कुछ भाग बटेश्वर स्थान मंदिर के क्षेत्र में आता है।

2. कासड़ी ब्लॉक:

कासड़ी मौजा में 14 खेसरे

लत्तीपुर में 55

माधोरामपुर में 46

खरीखाना में 2

कुतुबपुर में 1 खेसरे की पहचान हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस ब्लॉक में पहाड़ी क्षेत्र है। कुछ जगहों पर आबादी और मकान भी स्थित हैं।

3. जगरनाथपुर ब्लॉक:

सलेमपुर सैनी मौजा की सिर्फ एक खेसरे में खनिज पदार्थ की संभावना जताई गई है। यहां भी स्थल पर पहाड़ी मौजूद है।

@ खनिज विकास पदाधिकारी महेश्वर पासवान ने बताया कि विभाग ने वन विभाग, सीओ और एसडीएम से रिपोर्ट मांगी थी, जो अब भेज दी गई है।

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