गिरिडीह उपचुनाव में जयराम महतो का बड़ा दांव, जेएलकेएम अकेले उतारेगी प्रत्याशी, इंडिया और एनडीए की बढ़ सकती है मुश्किल

रांची: झारखंड की सियासत में एक बार फिर जयराम महतो फैक्टर चर्चा के केंद्र में है। गिरिडीह विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी के इस फैसले से राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों इंडिया और एनडीए की चुनावी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। खासकर गिरिडीह में जयराम महतो की सक्रियता से चुनावी मुकाबले के दिलचस्प होने के आसार हैं।
2024 के विधानसभा चुनाव में जयराम महतो की पार्टी ने अपने प्रदर्शन से राज्य के राजनीतिक समीकरणों को काफी हद तक प्रभावित किया था। कई सीटों पर जेएलकेएम की मौजूदगी ने भाजपा और झामुमो के चुनावी समीकरण बिगाड़े थे। विशेष रूप से कुर्मी मतदाताओं के बीच जयराम महतो की लोकप्रियता ने स्थापित राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई थी। अब गिरिडीह उपचुनाव में पार्टी अपना प्रत्याशी उतारकर विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी में है। जयराम महतो का लक्ष्य अपने मौजूदा एक विधायक की संख्या को बढ़ाकर दो करना है।
रांची में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयराम महतो ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली को नैतिक समर्थन देने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बेहतर काम किया होता तो विपक्ष को रैलियां निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि देश का केंद्रीय नेतृत्व विभिन्न स्तरों पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।
जेपीएससी और जेएसएससी विवाद पर जयराम महतो ने झामुमो नेताओं की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने सुप्रियो भट्टाचार्य की पत्नी के पीए से जुड़े कथित पैसे के लेनदेन के मामले का जिक्र करते हुए उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन के दौरान खुद को निर्दोष बताने वाले लोगों तक अब सीआईडी की जांच पहुंच रही है। जयराम ने आरोप लगाया कि अभय तिवारी को किसी बड़े नेता के सहयोग के बिना इतनी हिम्मत नहीं मिल सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच बड़े अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचती है, तभी इसकी निष्पक्षता पर भरोसा कायम होगा।
जयराम महतो ने गिरिडीह के एक बड़े झामुमो नेता पर भी जेपीएससी- जेएसएससी घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गिरिडीह उपचुनाव में जेएलकेएम के अकेले मैदान में उतरने के फैसले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि जयराम महतो का यह चुनावी दांव इंडिया और एनडीए के वोट समीकरणों को कितना प्रभावित करता है।

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