खूंटी में पशु चिकित्सकों की भारी कमी, भ्रमणशील पशु चिकित्सकों के भरोसे चल रहे प्रखंड: उप प्रमुख अरुण साबू

खूंटी: खूंटी जिला के पशुपालन विभाग की स्थिति इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। जिले के लगभग सभी प्रखंडों में प्रखंड स्तर पर पशु चिकित्सकों की कमी बताई जा रही है। मुरहू प्रखंड सहित अन्य प्रखंडों में पशुपालन विभाग का संचालन मुख्य रूप से भ्रमणशील पशु चिकित्सकों के भरोसे हो रहा है। इसके कारण पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला स्तर से बताया जाता है कि प्रखंड पशुपालन विभाग में चिकित्सकों की नियमित बहाली का प्रावधान नहीं होने के कारण डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रखंड स्तर पर पशु चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं हैं, तो पशुपालन विभाग की योजनाओं का सही तरीके से संचालन और निगरानी कैसे होगी?
पशुपालन विभाग के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को दी जाने वाली अनुदान राशि, पशुधन वितरण योजना तथा अन्य सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर भी इसका असर पड़ रहा है। पशुधन योजनाओं में जांच एवं निगरानी करने वाले अधिकारियों की कमी के कारण लाभुकों को मिलने वाले पशुओं की गुणवत्ता और आपूर्तिकर्ताओं की कार्यप्रणाली की नियमित जांच नहीं हो पा रही है। इससे आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, किसानों और पशुपालकों को योजनाओं से संबंधित उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पाने के कारण भी कई समस्याएं सामने आ रही हैं। सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब विभाग में पर्याप्त चिकित्सक, जांच अधिकारी और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हों।
मुरहू के उप प्रमुख ने जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के पशुपालन विभाग का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया है। उन्होंने राज्य के कृषि एवं पशुपालन मंत्री से आग्रह किया है कि खूंटी जिले के सभी प्रखंडों में पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस पहल की जाए।
उन्होंने कहा कि यदि प्रखंड स्तर पर पशु चिकित्सक ही उपलब्ध नहीं रहेंगे, तो प्रखंड पशुपालन कार्यालय के संचालन का औचित्य क्या रह जाएगा? केवल भ्रमणशील चिकित्सकों के भरोसे पूरे प्रखंड की पशुपालन व्यवस्था संचालित करना पशुपालकों के हित में नहीं है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रखंड स्तर पर नियमित पशु चिकित्सा व्यवस्था बहाल की जाए, पशुधन योजनाओं की जांच एवं निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति हो, आपूर्तिकर्ताओं की नियमित जांच की जाए तथा किसानों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए।
उप प्रमुख ने कृषि एवं पशुपालन मंत्री से इस मामले पर गंभीरता से विचार कर खूंटी जिले की पशुपालन व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की है, ताकि किसानों और पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।

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