झारखंड भाजपा की गुटबाजी पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की स्वीकारोक्ति ने खोली पोल, खंड-खंड में बंटी भाजपा: कांग्रेस
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा कार्यसमिति की बैठक में राज्य भाजपा के भीतर गुटबाजी और बिखराव को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही झारखंड में अपनी पार्टी के खंड-खंड में बंटे होने की बात स्वीकार करनी पड़ रही है, तो प्रदेश भाजपा के नेता जनता को एकजुट नेतृत्व और मजबूत संगठन का भरोसा किस आधार पर दिला रहे हैं?
राकेश सिन्हा ने कहा कि झारखंड भाजपा की अंदरूनी खींचतान अब कोई छिपा हुआ विषय नहीं रह गई है। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों, नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई और नेतृत्व को लेकर असहमति की चर्चा लगातार होती रही है। अब राष्ट्रीय नेतृत्व की बैठक में इस मुद्दे का उठना बताता है कि भाजपा के संगठनात्मक हालात पर पार्टी के शीर्ष स्तर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपने नेताओं को एक मंच पर एकजुट नहीं रख पा रही, वह झारखंड की जनता के सामने एकजुट नेतृत्व का दावा कैसे करेगी? भाजपा के नेता 2029 की राजनीति को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन पहले उन्हें अपने संगठन की अंदरूनी दरारों का जवाब देना चाहिए।
राकेश सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता दिन में झारखंड की सत्ता हासिल करने के सपने देखते हैं और बैठकों में अपने ही संगठन की गुटबाजी पर चिंता जताते हैं। सवाल यह है कि भाजपा पहले अपने घर को संभालेगी या जनता को राजनीतिक उपदेश देती रहेगी?
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता केवल भाषण, पोस्टर और राजनीतिक दावों से प्रभावित होने वाली नहीं है। जनता यह भी देखती है कि किस पार्टी के नेता आपसी खींचतान में उलझे हैं और कौन जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रहा है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि झारखंड में आखिर कितने गुट सक्रिय हैं, उनके बीच नेतृत्व को लेकर क्या खींचतान है और राष्ट्रीय अध्यक्ष को कार्यसमिति की बैठक में इस विषय पर टिप्पणी करने की जरूरत क्यों पड़ी?
उन्होंने कहा कि 2029 का दावा करने से पहले भाजपा को अपने संगठन की एकजुटता साबित करनी होगी। केवल चुनावी नारे लगाने से संगठन मजबूत नहीं होता और केवल सत्ता का सपना देखने से जनता का विश्वास हासिल नहीं होता। भाजपा के लिए असली चुनौती कांग्रेस पर बयानबाजी करना नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं के बीच विश्वास और एकजुटता कायम करना है।


