राजधानी रांची में आदिवासियों का महाजुटान, परिसीमन और खान-खनिज संशोधन बिल के खिलाफ भरी हुंकार

रांची: राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन किया गया। रैली में झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। इस दौरान परिसीमन और खान-खनिज संशोधन अधिनियम (एमएमडीआर) के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी गई। वक्ताओं ने आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और राज्यों के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। साथ ही कई प्रस्ताव पारित किए गए।
रैली में कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, मध्य प्रदेश से आए आदिवासी नेता विक्रांत भूरिया, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, विधायक प्रदीप यादव, राजेश कच्छप, सुरेश बैठा, नमन विक्सल कोंगाड़ी समेत कई नेता मंच पर मौजूद रहे।
कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खान-खनिज संशोधन बिल को संसद में जबरन पारित कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून से झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर राज्यों के अधिकार और स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले संभावित बदलावों से आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होना चाहिए। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आरक्षित सीटों की संख्या कम करने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मध्य प्रदेश से पहुंचे विक्रांत भूरिया ने भी परिसीमन और एमएमडीआर संशोधन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा।
रैली को संबोधित करते हुए अन्य नेताओं ने भी कहा कि आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महाजुटान के माध्यम से केंद्र सरकार से आदिवासी हितों और राज्यों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत फैसले लेने की मांग की गई।

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