अणु बम के विरोध में चल रहे वैश्विक आंदोलन पर गांधी विचार का प्रभाव : राजगोपाल
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर अंतरराष्ट्रीय ख्याति के गांधीवादी विचारक राजगोपाल ने कहा कि मौजूदा सदी की वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महात्मा गांधी के विचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में अणु बम और युद्ध के विरोध में चल रहे आंदोलनों में गांधी विचार की प्रासंगिकता लगातार बनी हुई है।गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर दिशा ग्रामीण विकास मंच की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजगोपाल ने कहा कि कनाडा में अणु बम के विरोध में बड़ा अभियान चल रहा है और इस अभियान में गांधीजी के विचारों का महत्व देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध और विनाश के मौजूदा माहौल में दुनिया भारत से विश्वशांति के लिए मार्गदर्शन की उम्मीद कर रही है।
राजगोपाल भागलपुर में महात्मा गांधी के आगमन के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित गांधी उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम गांधी धाम और शोभनपुर गांधी आश्रम में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान वे वरिष्ठ गांधीवादी डॉ. मनोज मीता द्वारा महात्मा गांधी की आत्मकथा के अंगिका अनुवाद का लोकार्पण करेंगे। समारोह में पंजाब के लुधियाना निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता हरिओम जिंदल को बच्चों को सशक्त शिक्षा उपलब्ध कराने और उनके अधिकारों के लिए किए गए कार्यों के लिए गांधी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राजगोपाल सद्भावना यात्रा का नेतृत्व भी करेंगे तथा बांका के शोभनपुर गांधी आश्रम में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे।
अफ्रीका में गांधी विचार के विस्तार पर जोर:
राजगोपाल ने कहा कि अगस्त में अफ्रीका में हुए शांति सम्मेलन के बाद गांधी विचार और स्वावलंबन के क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में पहल की जा रही है। अफ्रीका के विभिन्न देशों में कार्यकर्ताओं को भेजने की योजना पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे हजारों अफ्रीकी युवाओं को गांधी विचार से परिचित कराना भी जिम्मेदारी है।उन्होंने बताया कि अफ्रीका के सामाजिक संगठनों ने गांधी विचार से जुड़े संगठनों से सहयोग की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वे 12 से 28 अक्टूबर तक स्विट्जरलैंड में रहेंगे।
G-7 की तर्ज पर P-7 की पहल:
राजगोपाल ने कहा कि G-7 की तुलना में P-7 के रूप में एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय पहल की दिशा में काम हो रहा है, जिसमें PEACE (शांति) को केंद्र में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में जापान, भारत, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, कनाडा और आर्मेनिया के सामाजिक संगठन शामिल हैं।उन्होंने कहा कि Peace Builders Forum India अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय है। संगठन से प्रशिक्षित लोग फिलिस्तीन, सेनेगल सहित कई देशों में शांति निर्माण के कार्यों में सक्रिय हैं। भगवान बुद्ध, महावीर, महात्मा गांधी और विनोबा भावे की विचार परंपरा वाले भारत से विश्वशांति के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता डॉ. शंभू दयाल खेतान ने की। स्वागत डॉ. मनोज मीता ने किया, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजकर्मी प्रसून लतांत ने किया।कार्यक्रम में हरिओम जिंदल, बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा, प्रो. शिवनारायण, बापू टावर पटना के निदेशक विनय कुमार, ललित कुमार सहित सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे।


