20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी मोदी सरकार के लोकतंत्र विरोधी चेहरे को बेनकाब करती है: राकेश सिन्हा

रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 20 दिनों से छात्रों के अधिकारों और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहे प्रख्यात शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी की तीखी निंदा करते हुए कहा कि यह मोदी सरकार की दमनकारी, तानाशाही और लोकतंत्र विरोधी सोच का एक और शर्मनाक उदाहरण है।
सिन्हा ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, पर्यावरण और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए समर्पित कर दिया, उसे अपनी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करने पर गिरफ्तार कर लिया गया। यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की आवाज़ को दबाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि आज देश में पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हैं। लेकिन इन सवालों का जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार पुलिस और प्रशासन के बल पर आंदोलनकारियों को कुचलने में लगी हुई है। यह सरकार संवाद से नहीं, बल्कि दमन से शासन चलाना चाहती है।
राकेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में जो भी व्यक्ति सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसे या तो गिरफ्तार कर लिया जाता है, या उसके खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग किया जाता है। किसानों से लेकर पहलवानों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक, हर वर्ग की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि भय और दमन की राजनीति है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई नागरिक 20 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठा है तो संवेदनशील सरकार का दायित्व उसकी बात सुनना और समाधान निकालना होता है। लेकिन केंद्र सरकार ने बातचीत के बजाय गिरफ्तारी का रास्ता चुना, जो उसकी असहिष्णुता और अहंकारी सोच को उजागर करता है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस दमनकारी कार्रवाई की घोर निंदा करती है और स्पष्ट करना चाहती है कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं होती। संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है, जिसे कुचलने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने की नीति बंद की जाए। जनता की आवाज़ को हथकड़ियों से नहीं रोका जा सकता।

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