सेंट्रल बैंक एससी/एसटी/ओबीसी कर्मचारी संघ के तृतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल
गणादेश,रांची: सेंट्रल बैंक एससी/एसटी/ओबीसी कर्मचारी संघ के तृतीय त्रैवार्षिक महाधिवेशन के दौरान रविवार को गंभीर विवाद उत्पन्न हो गया। सम्मेलन में बिना किसी मतदान प्रक्रिया के ही अध्यक्ष, सचिव, महासचिव और कोषाध्यक्ष जैसे प्रमुख पदों के नाम घोषित किए जाने पर संघ के चेयरपर्सन प्रेमन धान ने कड़ा विरोध जताया। उनका आरोप है कि विरोध करने के कारण उन्हें और उनके साथ मौजूद सैकड़ों साथियों को बैठक हॉल में प्रवेश करने से रोक दिया गया।
प्रेमन धान ने बताया कि महाधिवेशन की निर्धारित अवधि दोपहर दो से तीन बजे तक थी। वे अपने समर्थकों के साथ समय पर पहुंचे, लेकिन बैठक हॉल का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया गया और भीतर मात्र करीब दस लोग मौजूद थे। बाहर सैकड़ों सदस्य इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसी दौरान बिना वोटिंग के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी गई, जिसे उन्होंने अलोकतांत्रिक करार दिया।
चेयरपर्सन प्रेमन धान ने कहा कि 6 नवंबर 2025 को जारी नोटिस में आमसभा आयोजित करने और सभी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद सीमित लोगों के बीच निर्णय लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनरल सेक्रेटरी करम कर्म सिंह मुंडा ने यह कहकर पदों की घोषणा कर दी कि जिन्हें वह पद देंगे, वही मान्य होंगे, जो संगठन की लोकतांत्रिक परंपरा के खिलाफ है।
इसके बाद प्रेमन धान ने अपने साथियों के साथ बैठक हॉल के बाहर ही अलग से महाधिवेशन आयोजित किया, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव संपन्न कराया गया। इस चुनाव में प्रेमन धान को चेयरपर्सन, उमेश प्रसाद को अध्यक्ष, अमित एक्का को महासचिव तथा मुकेश आइन्ड को कोषाध्यक्ष चुना गया।
प्रेमन धान ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से संगठन को मजबूत करने और कर्मचारियों की समस्याओं को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में पारदर्शिता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।



