शिवराज सिंह ,हिमंता विश्व सरमा, और बाबूलाल मरांडी का खौफ झामुमो पर सर चढ़कर बोल रहा है: प्रतुल
रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि हेमंत सरकार 1,2 और 3 में बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों को जमाई का दर्जा प्राप्त है। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद राज्य सरकार इन घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर निकालने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रही।इस मुद्दे पर उच्च न्यायालय में शपथ पत्र भी उपायुक्त की जगह कनीय अधिकारी दे रहे हैं। यह साफ दिखता है कि घुसपैठियों के मुद्दे पर राज्य सरकार तुष्टिकरण की आग में अंधी हो गई है।
प्रतुल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी रोटी, माटी और बेटी की रक्षा के लिए संकल्पित है। सत्ता में आने पर वह हर प्रयास करेगी कि यह बांग्लादेशी घुसपैठियें इन आदिवासी बेटियों से ठग कर विवाह कर लव जिहाद ,लैंड जिहाद और पॉलिटिकल जिहाद ना कर पाए । राज्य सरकार के ही स्पेशल ब्रांच ने 2 जून, 2023 को पत्र लिखकर इस बात को स्वीकारा था कि संताल के मदरसों में बड़े पैमाने पर मुस्लिम घुसपैठियों को ठहराया जाता है। उनके दस्तावेज भी तैयार किए जाते हैं।फिर उन्हें बसाया जाता है।प्रतुल ने कहा सिर्फ तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के कारण हेमंत सरकार लागातर मुस्लिम घुसपैठियों को आदिवासियों के हक पर डाका डालने दे रही है।
प्रतुल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबका साथ ,सबका विकास, सबका विश्वास के फार्मूले पर काम करती है। वह वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति पर विश्वास नहीं करती । प्रतुल ने कहा अब समय आ गया कि एक बार यह रियलिटी चेक हो कि इन मदरसों से मुसलमान बच्चों को वास्तविकता में कितना फायदा मिल रहा है।अगर इन बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाए तो यह समाज में अपना बेहतर योगदान दे पाएंगे। लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के कारण इन मुस्लिम बच्चों का विकास नहीं चाहती।
प्रतुल ने कहा कि अब झारखंड मुक्ति मोर्चा के सर पर शिवराज सिंह चौहान, हेमंत बिस्वा सरमा और बाबूलाल मरांडी के सामूहिक नेतृत्व का डर चढ़ता जा रहा है।इनको पता है कि अगले चुनाव में इनका सफाया होना निश्चित है। इसलिए यह रोज इन नेताओं को टारगेट करके अनर्गल बयान बाजी कर रहे हैं। बाबूलाल मरांडी जी के फोबिया से पूरी झारखंड मुक्ति मोर्चा ग्रसित है। उनके दौरों की तो बात छोड़िए।उनके एक ट्वीट से भी झामुमो के नेताओं के हाथ पांव फूल जाते हैं। प्रतुल ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वो कोई कड़ा कानून बनाएंगे या फिर वोट के कारण इन आदिवासी बेटियों के हित के साथ लगातार समझौता करते रहेंगे

