धान रोपनी करती नजर आई पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन
रांची :पलामू जिले की पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीष्मा रमेशन ने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करते हुए अपने आवासीय परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धान रोपाई की। उन्होंने न केवल खेत में उतरकर खुद अपने हाथों से धान की रोपनी की, बल्कि इससे पहले लोकगीत गाए, पूजा-अर्चना की और पूरी विधि-विधान से यह पारंपरिक प्रक्रिया निभाई। यह दृश्य न सिर्फ देखने योग्य था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत प्रेरणादायक भी रहा।
झारखंड में मानसून की शुरुआत के साथ ही खेतों में धान की रोपाई का कार्य तेज़ी से चल रहा है। ऐसे समय में एसपी का यह कदम यह दर्शाता है कि प्रशासनिक अधिकारी भी समाज की जड़ों से जुड़े हुए हैं और परंपराओं का सम्मान करते हैं। रीष्मा रमेशन का यह कार्य किसानों के लिए उत्साहवर्धक रहा और उन्होंने यह साबित किया कि खेती केवल एक पेशा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का हिस्सा है।
धान रोपनी के दौरान लोकगीत गाने और पारंपरिक विधियों को अपनाकर एसपी ने न सिर्फ ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिकता के बीच अपनी परंपराओं को जीवित रखना कितना आवश्यक है। उनके इस प्रयास से समाज में यह सकारात्मक संदेश गया है कि किसी भी पद पर रहने वाला व्यक्ति अगर चाहे, तो समाज और संस्कृति को मजबूती दे सकता है।
एसपी रीष्मा रमेशन की यह पहल निश्चित रूप से एक प्रेरणा है—खासकर युवाओं के लिए, जिन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने की आवश्यकता है। उनका यह कृत्य सेवा, समर्पण और समाज के साथ आत्मीय संबंध की मिसाल बन गया है। यह घटना न केवल प्रशासनिक मानवता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण जीवन और परंपराओं की सुंदरता को भी उजागर करती है।



