सादीपुर में यज्ञ नहीं, संस्कारों का महासंगम,24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में आहुतियों के साथ
भागलपुर। पीरपैंती प्रखंड का सादीपुर गांव इन दिनों केवल एक गांव नहीं, बल्कि वैदिक चेतना और संस्कारों का जीवंत केंद्र बन गया है। यहां आयोजित 24 कुण्डीय राष्ट्र शौर्य समृद्धि गायत्री महायज्ञ सह संस्कार महोत्सव ने पूरे क्षेत्र को मंत्रोच्चार, श्रद्धा और संकल्प की ऊर्जा से भर दिया है।शांतिकुंज, हरिद्वार के मार्गदर्शन में चल रहे इस आयोजन में 24 हवन कुंडों पर 24 यजमान दंपतियों के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ आहुतियां दीं। अग्नि में समर्पण केवल सामग्री का नहीं, बल्कि राष्ट्र की समृद्धि और विश्व शांति की कामना का था।जब बुराइयां भी हुईं स्वाहायज्ञ का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया, जब श्रद्धालुओं ने ‘देव-दक्षिणा’ के रूप में अपनी बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लिया। नशा, कुरीतियाँ और नकारात्मक आदतें इन सबको हवन कुंड में प्रतीकात्मक रूप से स्वाहा कर समाज को नई दिशा देने की शपथ ली गई।
शांतिकुंज का संदेश: संस्कार से ही सशक्त राष्ट्र
हरिद्वार से आए टोली नायक श्रीराम तपस्या जी ने प्रवचन में कहा कि ‘मानव में देवत्व का जागरण और धरती पर स्वर्ग का निर्माण’ ही गायत्री परिवार का लक्ष्य है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि संस्कार और चरित्र निर्माण के बिना राष्ट्र का शौर्य और समृद्धि संभव नहीं।
भंडारे में दिखी एकता की तस्वीर
हवन-पूजन और महाआरती के बाद मां अन्नपूर्णा भोजनालय में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। सादीपुर, हरीशपुर समेत आसपास के गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। जहां जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर केवल सेवा और समरसता दिखाई दी।
आयोजन समिति ने बताया कि आध्यात्मिक महोत्सव आगामी 17 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन यज्ञ, प्रवचन और संस्कार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

