सीएम नीतीश कुमार ने बिहटा स्थित आर.के. शर्ट्स यूनिट, डीवी रंजन बैग क्लस्टर व इंटीग्रेटेड इर्रैडिएशन सेंटर का निरीक्षण किया

पटना। बिहार में औद्योगिक विकास, ग्रामीण उद्यमिता व कृषि आधारित निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सीएम नीतीश कुमार ने बिहटा औद्योगिक क्षेत्र में तीन प्रमुख इकाइयों ,आर.के. शर्ट्स यूनिट, डीवी रंजन बैग क्लस्टर एवं सिकंदरपुर स्थित इंटीग्रेटेड इर्रैडिएशन सेंटर का दौरा किया।
मुख्यमंत्री ने इन इकाइयों द्वारा स्थानीय जीवन-यापन, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण व बिहार को कृषि-आधारित निर्यात व सूक्ष्म-उद्यम विकास का केंद्र बनाने में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की। गौरतलब हो कि
आर.के. शर्ट्स यूनिट को
मुख्यमंत्री ने इकाई में पुरुषों के परिधान जैसे शर्ट, टी-शर्ट, व स्कूल यूनिफॉर्म के निर्माण की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस यूनिट में वर्तमान में 180 से अधिक स्थानीय युवक-युवतियां कार्यरत हैं।जो मशीन संचालन, डिजाइनिंग, सिलाई एवं पैकेजिंग जैसे कौशल कार्यों में संलग्न हैं। भविष्य में यह यूनिट लगभग 1200 कर्मियों को रोजगार देगी। मशीनें मंगाई जा चुकी हैं।वहीं एक माह के भीतर डिलीवरी अपेक्षित है।
आर.के. शर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 2024 में शर्ट निर्माण हेतु 37,056 वर्ग फुट में फैला शेड नंबर B1 आवंटित किया गया था। अप्रैल 2025 से इस यूनिट में उत्पादन प्रारंभ हो चुका है।
• परियोजना लागत: ₹7 करोड़
• प्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 600 लोग
• अप्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 120 लोग
• पटना यूनिट में Polo, Lucky और J Crew, Calvin Klein, Hackett, Woolrich, Lauren, Tommy Hilfiger जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के लिए शर्ट्स बनाई जा रही हैं।
डीवी रंजन बैग क्लस्टर
इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीवी रंजन बैग क्लस्टर का दौरा किया, जो हस्तनिर्मित, कैनवास, एवं कॉर्पोरेट गिफ्टिंग बैग्स के निर्माण में संलग्न है। यह इकाई महिला-नेतृत्व वाले उद्यम का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहां 80% से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं। इन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं स्थानीय NGOs के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है।
यह क्लस्टर प्रतिदिन 500 से अधिक बैग्स का उत्पादन करता है, जिन्हें भारत के विभिन्न बाजारों में आपूर्ति की जाती है। मुख्यमंत्री ने इन महिलाओं के समर्पण, कौशल और उद्यमिता की सराहना की।
M/s DV Ranjan Sports Gear Manufacturing Pvt. Ltd.
2024 में इस इकाई को बैग निर्माण के लिए ग्राउंड फ्लोर पर 16,000 वर्ग फुट में फैला शेड नंबर B6 आवंटित किया गया। मार्च 2025 से इस शेड में उत्पादन शुरू हुआ।
• परियोजना लागत: ₹4 करोड़
• प्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 120 लोग
• अप्रत्यक्ष रोजगार: लगभग 40 लोग
इंटीग्रेटेड इर्रैडिएशन सेंटर, सिकंदरपुर
मुख्यमंत्री ने दौरे के अंत में ₹58.15 करोड़ की लागत से निर्मित अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड इर्रैडिएशन सेंटर का निरीक्षण किया। यह केंद्र फलों, सब्जियों, मसालों, हर्बल उत्पादों, मांस एवं मछली जैसी कृषि उत्पादों की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने, सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं निर्यात की दृष्टि से तैयार करने हेतु स्थापित किया गया है।
यह केंद्र 3000 kCi क्षमता के कोबाल्ट-60 विकिरण स्रोत से सुसज्जित है, जिसमें 4000 मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज, 4000 मीट्रिक टन का ड्राई वेयरहाउस एवं प्रति घंटे 2 मीट्रिक टन की प्रसंस्करण क्षमता वाला निर्यात पैक हाउस मौजूद है।
यह तकनीक वैश्विक फाइटोसेनिटरी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करती है।जिससे रासायनिक उपचार की आवश्यकता के बिना बिहार के उत्पाद सीधे निर्यात के लिए उपयुक्त हो जाते हैं।
अब तक इस केंद्र से लीची एवं जर्दालु आम का सफलतापूर्वक UAE और कतर जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात हो चुका है। इसके अतिरिक्त हाल ही में “Gift from Bihar” पहल के अंतर्गत 2,000 से अधिक प्रीमियम जर्दालु आम के बॉक्स राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को उपहार स्वरूप भेजे गए हैं। इस केंद्र में 100 से अधिक स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार दिया गया है, जो अब सीधे कृषि-निर्यात आपूर्ति श्रृंखला में योगदान दे रहे हैं।
इन तीनों इकाइयों से 350 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जिनमें अधिकांश स्थानीय समुदायों से हैं। ये प्रयास समावेशी विकास को बढ़ावा देते हैं।विशेषकर महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता, एवं राज्य में कुशल कार्यबल के निर्माण के माध्यम से। मुख्यमंत्री के दौरे से यह स्पष्ट होता है कि बिहार सरकार MSME विकास, कृषि नवाचार व आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर प्रतिबद्ध है।सीएम के साथ
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह, निदेशक (उद्योग) मुकुल गुप्ता, निदेशक (फूड प्रोसेसिंग) निखिल धनराज निप्पणिकर, निदेशक (तकनीकी विकास) शेखर आनंद एवं BIADA के कार्यकारी निदेशक चंद्रशेखर सिंह उपस्थित थे।

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