हेमंत सरकार की लापरवाही से गोड्डा होम्योपैथिक कॉलेज की मान्यता खतरे में :अजय साह

रांची :भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने गोड्डा स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की गंभीर अव्यवस्था और इसकी मान्यता पर मंडरा रहे संकट को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य का एकमात्र होम्योपैथिक कॉलेज, सरकार की लापरवाही और संवेदनहीनता के चलते अपने अस्तित्व और पहचान दोनों को खोने की कगार पर है। जबकि भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लगातार सहयोग दे रहा है, राज्य सरकार के रवैये से ऐसा प्रतीत होता है मानो वह जानबूझकर इस संस्थान को विफलता की ओर धकेलना चाहती है।

कॉलेज में आज तक स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे संस्थान में प्रशासनिक कार्य ठप पड़ गए हैं। अब तक जो भी प्राचार्य आए, उन्होंने सिर्फ वित्तीय बाधाओं और विभागीय पत्राचार का हवाला देकर ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ा है। इसके अलावा, कॉलेज में 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले बीते एक दशक से मात्र 8–10 शिक्षक कार्यरत हैं, जो शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाता है।

कॉलेज में छात्रावास की बेहद कमी है। छात्राओं को अस्पताल या हॉल जैसे स्थानों में बिना किसी मूलभूत सुविधा के एक साथ रहने को मजबूर किया गया है। साथ ही, इंटर्न हॉस्टल के अभाव में छात्रों को प्रतिदिन 40 किलोमीटर दूर गोड्डा शहर से कॉलेज तक आना-जाना पड़ता है, जिससे लगातार सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएँ सामने आ रही हैं। यह केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि खतरनाक भी है।इंटर्न्स की समस्याओं का जिक्र करते हुए साह ने कहा कि इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों को 10,000 मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। इतना ही नहीं, छात्रों को यह नाममात्र राशि भी समय पर नहीं मिलती, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। कॉलेज की अधिकांश प्रयोगशालाएँ उपकरणों की भारी कमी से जूझ रही हैं। जो उपकरण मौजूद हैं, वे या तो खराब हैं या बेकार। इससे छात्रों की प्रैक्टिकल शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जो मेडिकल शिक्षा की मूल आत्मा है।

कॉलेज परिसर में बिजली गुल होने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जिससे पूरा क्षेत्र अंधकार में डूब जाता है और पढ़ाई ठप हो जाती है। वहीं, कॉलेज में नियमित कर्मचारियों की भारी कमी है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण कई विभाग वर्षों से बंद पड़े हैं, और आने वाले मरीजों को दवा, एक्स-रे और खून जांच जैसी बुनियादी सेवाएं तक नहीं मिलतीं।

साह ने आगे कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि कॉलेज और अस्पताल परिसर में एक भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। न मरीजों को और न ही छात्रों को आपात स्थिति में तत्काल मदद मिल पाती है। अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जो एक मेडिकल संस्थान के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो केंद्रीय होम्योपैथी परिषद द्वारा इस कॉलेज की मान्यता कभी भी रद्द की जा सकती है। जबकि हर वर्ष यहां नीट के माध्यम से 60 छात्रों का नामांकन होता है, राज्य सरकार की लापरवाही ने इस संस्थान को बर्बादी के रास्ते पर ला खड़ा किया है। करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा है, जो सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। भाजपा की माँग को दुहराते हुए साह ने कहा कि रिम्स २ का ख़्वाब दिखाने से पहले सरकार पहले से चल रहे अस्पतालों को दुरुस्त करे।

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