आयुर्वेद में झारखंड को देश का हब बनाएंगे : डॉ. इरफान अंसारी
रांची : झारखंड प्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के प्रथम स्थापना दिवस एवं आयुर्वेद दिवस के अवसर पर रविवार को डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि झारखंड में आयुर्वेद, आयुष, योग और प्राकृतिक चिकित्सा की अपार संभावनाएं हैं। सरकार इन पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़कर राज्य को आयुर्वेद के क्षेत्र में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
मंत्री ने कहा कि झारखंड में जंगल, औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का बड़ा भंडार है। इन संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि करीब 900 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है और इसके लिए जमीन भी चिन्हित की जा चुकी है।
डॉ. अंसारी ने कहा कि उनका प्रयास है कि झारखंड में केरल की तर्ज पर मजबूत आयुर्वेदिक स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित हो और भविष्य में देश के दूसरे राज्यों तथा विदेशों से भी लोग यहां आयुर्वेदिक उपचार के लिए आएं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को केवल इलाज तक सीमित न रखकर योग, प्राणायाम, संतुलित आहार, बेहतर दिनचर्या और प्राकृतिक जीवनशैली से भी जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य आयुष पद्धतियों का उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। आयुष क्षेत्र में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी मानव संसाधन, शोध और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि आयुर्वेद की पारंपरिक ज्ञान-व्यवस्था को आधुनिक वैज्ञानिक शोध और प्रमाण-आधारित चिकित्सा से जोड़ना समय की जरूरत है। कार्यक्रम में डॉ. आनंद कुमार, डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी, जगन्नाथ द्विवेदी, उमेश शर्मा, सुदामा प्रसाद, सुबोध दुबे, डॉ. उमाशंकर शर्मा, दिनेश कुमार यादव समेत कई विशेषज्ञ और चिकित्सक मौजूद रहे।


