5 अगस्त को निकलेगी पड़ाव संघ की 114वीं ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा : 81, 61, 51,31 फीट की अद्भुत कांवड़ें होंगी शामिल
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। जिले के कहलगांव स्थित उत्तरवाहिनी गंगा का पावन जल कांवड़ में भरकर पड़ाव संघ की 114वीं ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा 5 अगस्त, बुधवार को शहर स्थित किला दुर्गा स्थान से प्रारंभ होगी।

कांवड़ियों की विदाई में संपूर्ण शहरवासी शहर के अंतिम छोर तक उनके साथ चलेंगे। पड़ाव संघ के अध्यक्ष अरबिंद सिंह, ट्रस्ट अध्यक्ष संतोष चौधरी ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 81, 61, 51 और 31 फीट लंबी अद्भुत कांवड़ें होंगी। संघ का यह मानना है कि इतना बड़ा जत्था देश के किसी कोने से नहीं निकलता है। यात्रा में करीब पांच हजार कांवडिया एक साथ चलते, आरती, विश्राम व प्रसाद ग्रहण करते। प्रत्येक दिन संध्या प्रहर बनारस से आए पंडितों द्वारा कांवड की भव्य पूजा अर्चना होती है। इसलिए पड़ाव संघ की कांवड यात्रा को ऐतिहासिक कहा जाता है। यह जत्था आगामी 10 अगस्त यानी द्वितीय सोमवारी को फौजदारी बाबा बासुकीनाथ के दरबार में जलाभिषेक करेंगे।

कहलगांव से घोघा के बीच एनएच-80 पर हर पड़ाव पर ग्रामीण शरबत, जल व पान के साथ कांवड़ियों की सेवा में खड़े रहेंगे। शाम होते ही कांवड़िए घोघा स्थित ब्रह्मचारी बाबा की कुटी में रात्रि विश्राम करेंगे, जहां सांसद अजय मंडल अपने सहयोगियों के साथ स्वागत करेंगे। रात्रि भंडारा सांसद द्वारा कांवड़ियों एवं जिले से आए हजारों शिव भक्तों के लिए आयोजित किया जाएगा। पौ फटने से पूर्व कांवड़िए अगले पड़ाव के लिए रवाना हो जाएंगे। यात्रा के दौरान संघ की ओर से मेडिकल सेवा, जल, शर्बत, चाय, नाश्ता, भोजन की व्यवस्था रहती है।
वहीं सन्हौला में भंडारा कहलगांव विधायक ई. शुभानंद मुकेश की ओर से कराया जाएगा। प्रत्येक पड़ाव पर देश के प्रसिद्ध भजन गायकों के भजनों की गंगा बहेगी, जिसमें कांवड़िए और ग्रामीण झूमेंगे, नाचेंगे और गाएंगे। दिल्ली से आई झांकी का आनंद लेंगे।
संघ के अध्यक्ष अरविंद सिंह एवं सचिव गौतम चौधरी ने बताया कि यात्रा के दिन-रात्रि पड़ाव इस प्रकार होंगे। पड़ाव संघ, कांवर यात्रा के दिन और रात्रि विश्राम स्थल निम्नलिखित हैं:-
5 अगस्त (बुधवार) – किला दुर्गा स्थान से यात्रा प्रांरभ शाम 5 बजे
5 अगस्त बुधवार(रात्रि) – घोघा – ब्रह्मचारी बाबा कुटी आश्रम
6 अगस्त(गुरुवार) (दिन) – सन्हौला – शिव मंदिर
6 अगस्त गुरुवार (रात्रि) – धोरैया – ब्लॉक परिसर
7 अगस्त शुक्रवार (दिन) – पंजवारा – केनरा बैंक परिसर
7 अगस्त शुक्रवार (रात्रि) – बौसी – बौसी मेला मैदान
8 अगस्त शनिवार (दिन) – शिव-पार्वती धाम (झारखंड) बॉर्डर से 3 किमी पहले)
8 अगस्त (रात्रि) – दुमका कैंप – कूर्माहाट (हंसडीहा)
9 अगस्त (रविवार ) (दिन) – श्री श्याम सेवा संघ – (गोड्डा कैंप, नोनीहाट)
9 अगस्त(रात्रि) – दर्शनिया
10 अगस्त (प्रातःकाल) – द्वितीय सोमवार
बाबा बासुकिनाथ के दरबार में जलाभिषेक।
‘पड़ाव संघ’ नाम की उत्पत्ति:
कहा जाता है कि शहर के ही एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार के स्व. घनश्याम दास शर्मा उर्फ घड़सी महाराज ने अपने पांच मित्रों के साथ कहलगांव स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट से कमंडल में जल भरकर वर्षों पहले कहलगांव गंगा तट से पहली पैदल यात्रा शुरू की थी। उस समय यह मार्ग घने जंगलों, पहाड़ों और पगडंडियों से होकर गुजरता था।बाद में झूसी-आगरा के संत स्व. प्रभुदत्त ब्रह्मचारी, स्व. भागवत ठाकुर, स्व. सोहन साह सैकड़ों भक्तों के साथ भगवान जगन्नाथपुरी और चारों धाम की यात्रा पर निकले। घड़सी महाराजजी अपने पांच मित्रों के साथ रविवार को अहले सुबह कहलगांव से यात्रा आरंभ करते और बौंसी तक पहुंचते, वहां रात्रि विश्राम करते और फिर सोमवार को अहले सुबह यात्रा शुरू कर देर शाम बाबा बासुकीनाथ के दरबार पहुंचकर जलाभिषेक करते। यह परंपरा प्रत्येक सावन सोमवारी को निभाई जाती थी। बौंसी में रात्रि विश्राम को ही ‘पड़ाव’ कहते थे और समय के साथ इस परंपरा से ‘पड़ाव संघ’ नाम की उत्पत्ति हुई। आज यह यात्रा अपनी 10वीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है।
