आदिवासी पर्व-त्योहारों को दूसरे धर्म के नाम पर मनाने का पुरजोर विरोध: आदिवासी संगठन
रांची: करम पर्व को लेकर शुक्रवार को प्रेस क्लब में केंद्रीय सरना समिति ने प्रेस वार्ता कर ईसाइयों के द्वारा चर्च, गिरजा घरों में करम देवता को गाड़ कर अपमानित और खिलवाड़ किए जा पर विरोध दर्ज किया।
आदिवासी संगठनों ने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय के अपने पर्व-त्योहार मनाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। ईसाई समुदाय भी अपने धार्मिक पर्व और त्योहार स्वतंत्र रूप से मनाए, इसका वे सम्मान करते हैं। हालांकि, संगठनों ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज के पारंपरिक पर्व-त्योहारों को आदिवासी संस्कृति और पहचान के नाम पर ईसाई समुदाय द्वारा मनाए जाने का वे पुरजोर विरोध करेंगे।
संगठनों का कहना है कि आदिवासी समाज के पर्व-त्योहार उसकी सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन पर्वों को उनके मूल स्वरूप और परंपराओं के अनुरूप ही मनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी पर्वों और धार्मिक परंपराओं को दूसरे धर्मों से जोड़कर प्रस्तुत करने से आदिवासी समाज की पहचान और संस्कृति प्रभावित होती है।
संगठनों ने कहा कि उनका विरोध किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को लेकर है। उन्होंने संबंधित लोगों से आदिवासी पर्व-त्योहारों की मूल परंपरा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।सरना समिति ने कहा कि ईसाइयों द्वारा लिखित पुस्तक खड़िया धर्म और संस्कृति का विश्लेषण एवं आदिवासी मिस्सा संग्रह मे कहा गया है कि वैटिंकन विश्व सभा के निर्देशन के आधार पर हमने अपने आदिवासी त्योहारों का अध्ययन एवं संशोधन किया और उन्हें अब हम ख्रीस्तीय ढंग से अर्थात ईसाई विधि से सरहुल और करम आदि त्योहारों को मना सकते हैं। आज उसी निर्देशन के अनुसार हम आदिवासियों का आराध्य देव करम देवता को चर्च/गिरजा घरों के अंदर बालू का टिना में खड़ा कर हमारे आराध्य देव करम देवता को अपमानित कर रहे हैं। केन्द्रीय सरना समिति आदिवासी/जनजाति संगठनों ने कहा है कि एक तरफ हम आदिवासियों का पर्व त्यौहारों को बुरा करम कहना इसे आदिवासी समाज ही से हटाने की बात करना, वहीं ईसाइयों के द्वारा हम आदिवासी त्योहारों को संशोधन कर ख्रीस्तीय ढंग से मनाना आप मानने वाले संशोधन करने वाले होते कौन हैं ये सरासर ग़लत है।
इस विषय को लेकर 16 सितंबर को केन्द्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी संगठनों ने रांची के उपायुक्त को एक लिखित रूप से इस पर रोक लगाने की मांग की है।आदिवासी संगठनों ने कहा की ईसाई अपना पर्व त्यौहार को मनाए उसमे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर आदिवासियों का परब त्यौहार को आदिवासी के नाम से धर्म परिवर्तन ईसाई लोग मनाएंगे तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।इस प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, डॉ बिरसा उरांव, सोमा उरांव, अंजलि लकड़ा, शनि उरांव, अजय कुमार भोगता , झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव, रवि प्रकाश उरांव, एवं अन्य संगठन के विमल पहान, सतीश उरांव, विश्वकर्मा पहचान, अविनाश मुंडा, प्रदीप लकड़ा, राकेश मुंडा, संतोष मुंडा, अंजन मुंडा, विक्रम उरांव, रानी करमाली, रुक मनी देवी, मुकेश मुंडा, मुन्ना हेंब्ररोम आशीष मुंडा, गुड्डू पहान रवि करमाली, अजय मुंडा, प्रदीप मुंडा आदि उपस्थित थे।


