बाल संरक्षण, बाल अधिकार एवं “ढूकु प्रथा” जैसी सामाजिक कुप्रथा की रोकथाम को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
खूंटी : जिला बाल संरक्षण इकाई, खूंटी एवं एचएसी फाउंडेशन, रनिया (खूंटी) के संयुक्त तत्वावधान में जिला समाहरणालय, खूंटी स्थित डी.आर.डी.ए सभागार में जिला स्तरीय एडवोकेसी परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सरकारी अधिकारियों एवं गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल कल्याण, सुरक्षा एवं बच्चों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाना तथा ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति के गठन एवं सशक्तिकरण पर विचार-विमर्श करना था।
बैठक में विशेष रूप से बाल विवाह एवं “ढूकु प्रथा” जैसी सामाजिक कुप्रथा की रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा इसके निराकरण हेतु सामुदायिक स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार करने पर बल दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में HAC फाउंडेशन की ओर से परियोजना नेतृत्वकर्ता श्रीमती अंजनी रानी टोप्पो ने संस्था का परिचय देते हुए बताया कि हेल्प अ चाइल्ड संस्था रनिया प्रखंड के तीन पंचायतों के 20 गांवों में बच्चों के संरक्षण एवं शिक्षा से जुड़े विषयों पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था आंगनवाड़ी, चाइल्ड डेवलपमेंट, आजीविका एवं अभिभावकों के प्रशिक्षण के माध्यम से समुदाय को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।
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सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग श्री आनंद कुमार ने विभाग द्वारा जारी बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के गठन संबंधी मार्गदर्शिका की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्राम बाल संरक्षण समिति को प्रभावी एवं सशक्त बनाने के लिए सभी विभागों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला के उपरांत एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।
जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी मोहम्मद अल्ताफ खान ने कहा कि बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति का गठन कर बच्चों की भागीदारी, सुरक्षा एवं अधिकारों को सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने सभी VLCPC सदस्यों को अपने दायित्व एवं भूमिका को समझने पर जोर देते हुए कहा कि जिले में कार्यरत सभी गैर सरकारी संगठनों को समन्वित रूप से कार्य करने की आवश्यकता है, ताकि समय-समय पर त्रैमासिक बैठक आयोजित कर कार्यों की समीक्षा की जा सके।
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बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदाधिकारी द्वारा बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी सहायता एवं परामर्श की जानकारी दी गई। उन्होंने महिला एवं बाल अधिकारों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, अनुच्छेद 14, 15(ग), 21, 23, 28 एवं 45 की विस्तृत जानकारी साझा की। साथ ही पोक्सो एक्ट से संबंधित नियमों एवं कानूनी प्रक्रियाओं पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
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जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती अनिशा कुजूर ने बाल विवाह एवं “ढूकु प्रथा” के दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह सामाजिक कुप्रथा बच्चियों के मानसिक एवं शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सक्रिय होकर समुदाय को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि समाज को इस कुप्रथा से दूर किया जा सके।
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जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण पदाधिकारी शमीमुद्दीन अंसारी द्वारा विभागीय मार्गदर्शिका के अनुरूप बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के गठन एवं क्रियान्वयन से संबंधित प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।
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कार्यक्रम में डालसा सचिव, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित जिला बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारी एवं कर्मी, चाइल्ड हेल्पलाइन के कर्मी, जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं HAC फाउंडेशन, रनिया से परियोजना नेतृत्वकर्ता, सीपी स्पेशलिस्ट, सहित अन्य कर्मियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।



