पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन का प्रत्यक्ष दस्तावेज है ‘नील नायक’
बेतिया/ राजेश कुमार,बेतिया। पूर्व क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ब्रजेश ओझा ने कहा कि हम विदेशों और दूसरी सभ्यताओं का इतिहास तो पढ़ लेते हैं, लेकिन अपने स्थानीय महापुरुषों को भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ी को अपने महापुरुषों के बारे में नहीं बताया गया, तो वे इतिहास से मिट जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल आजादी की लड़ाई के ऐसे नायक थे, जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला, जबकि गांधी जी को महात्मा बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
वे सेराजेम सभागार में प्रसिद्ध नाटककार एवं चम्पारण साहित्य संस्थान के संयोजक डॉ दिवाकर राय की पुस्तक ‘नील नायक’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। आभाष झा ने शिव वंदना प्रस्तुत की तथा अतिथियों का अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया। इसके बाद डॉ दिवाकर राय द्वारा रचित नाटक ‘नील नायक’ का लोकार्पण किया गया।
राजकुमार शुक्ल की वंश परंपरा के वाहक मणिभूषण राय ने कहा कि जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया, ऐसे महापुरुषों को वर्तमान व्यवस्था ने भुला दिया है। उन्होंने कहा कि ‘नील नायक’ वास्तविक नायकों को स्थापित करने का सार्थक प्रयास है।
इस अवसर पर वरीय साहित्यकार सुरेश कुमार गुप्त ने चंपारण के निलहा आंदोलन पर विस्तार से प्रकाश डाला। पूर्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार सिंह ने पंडित राजकुमार शुक्ल की प्रतिमा जिला मुख्यालय में स्थापित करने की मांग की। महारानी जानकी कुँअर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ सुरेन्द्र प्रसाद केसरी ने निलहा आंदोलन पर आधारित विभिन्न पुस्तकों की चर्चा की। वहीं साहित्यकार नंद कुमार मिश्र ने नई पीढ़ी तक स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें अरुण गोपाल, सत्येन्द्र गोविन्द, अंशुमन कुमार, गोविन्द कुमार मिश्र, श्वेता कुमारी चौबे, शालिनी रंजन, अर्पणा कुमारी और अनुराग कुमार ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंजनी कुमार सिन्हा ने तथा मंच संचालन कृष्ण मोहन प्रसाद और प्रशांत सौरभ ने किया।
इस अवसर पर डॉ अनिल कुमार मोटानी, डॉ देवीलाल यादव, मदन बनिक, नरेंद्र झा, गोविन्द झा, अरविंद कुमार मिश्र, कुंदन शांडिल्य, उत्तम मोटानी, सत्येन्द्र शरण, रवीन्द्र किशोर राय, इन्दु देवी, राजकिशोर प्रसाद, राजा राम राय, अखिलेश्वर मिश्र, ललन पाण्डेय लहरी, मृत्युंजय पाण्डेय, निकुंज कुमार दुबे, प्रमोद कुमार, जीतेन्द्र कुमार, मुनीन्द्र मिश्र, जय किशोर जय, चन्द्रिका राम, पंकज कुमार सहित सैकड़ों साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।



