झारखंड में मरीजों को ढोने वाली एम्बुलेंस सेवा खुद बदहाल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
रांची: झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली सरकारी निःशुल्क 108 एम्बुलेंस सेवा खुद ही बदहाल और जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट में एम्बुलेंस खरीद और संचालन में भारी वित्तीय एवं तकनीकी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 280 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एम्बुलेंस जून 2026 तक आरसीएच नामकुम परिसर में बेकार पड़ी मिलीं। एजी ने इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरानी एम्बुलेंसों का उपयोग सुनिश्चित किए बिना नई गाड़ियों की खरीदारी की गई, जिससे करोड़ों रुपये का अनावश्यक खर्च हुआ।
एजी रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लंबे समय से खड़ी इन एम्बुलेंसों के बीमा पर भी लाखों रुपये खर्च किए गए, जबकि आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिला। ऑडिट में एम्बुलेंस खरीद प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय और तकनीकी गड़बड़ियों की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस सनातन बस कंपनी को एम्बुलेंस निर्माण का ठेका दिया गया, उसका सालाना टर्नओवर मात्र 8.38 करोड़ रुपये था, जबकि निविदा नियमों के अनुसार कंपनी का टर्नओवर कम से कम 20 करोड़ रुपये होना चाहिए था। इतना ही नहीं, संबंधित कंपनी के पास एम्बुलेंस निर्माण का लाइसेंस भी नहीं था और उसने बाद में अपना नाम बदलकर “सनातन बॉडी बिल्डर्स” के नाम से प्रमाण पत्र जारी किया, जो मूल निविदा दस्तावेज का हिस्सा नहीं था।
एजी ने 80 करोड़ रुपये की लागत से 237 नई एम्बुलेंसों की खरीद को भी गैरजरूरी सरकारी खर्च बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक पुरानी 206 एम्बुलेंसों के उपयोग और स्थिति का स्पष्ट विवरण नहीं दिया जाता, तब तक नई खरीद को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एजी द्वारा कई बार एम्बुलेंस खरीद से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट और दस्तावेज मांगे गए, लेकिन विभाग की ओर से उपलब्ध नहीं कराए गए। इस खुलासे के बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



