रांची में एससी,एसटी अधिकारों पर राष्ट्रीय कार्यशाला 14 मार्च को, पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन होंगे मुख्य अतिथि
रांची: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक चुनौतियों और विकास से जुड़े मुद्दों पर मंथन के उद्देश्य से राजधानी रांची में 14 मार्च को एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। यह जानकारी रविवार को कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने अपने सरकारी आवास पर प्रेसवार्ता कर कही।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नए विधानसभा परिसर स्थित सभागार में होगा, जिसमें देशभर के विधि विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं की भागीदारी रहेगी।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष जस्टिस केजी बालाकृष्णन होंगे। आयोजन का उद्देश्य केवल विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि एससी/एसटी समुदायों के विकास में बाधा बन रही जमीनी समस्याओं की पहचान कर व्यावहारिक सुझाव तैयार करना भी है।
कार्यक्रम में संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, आदिवासी भूमि हस्तांतरण और भूमि कानूनों,सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट एवं पेसा कानून के उल्लंघन जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा सरकारी सेवाओं और निर्णय प्रक्रिया में आदिवासियों के कम प्रतिनिधित्व, शिक्षा क्षेत्र में उच्च ड्रॉपआउट दर, न्याय व्यवस्था की चुनौतियां तथा आदिवासियों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।
कार्यशाला में विकास परियोजनाओं से प्रभावित आजीविका, विस्थापन एवं मानव तस्करी की समस्या, वन अधिकार अधिनियम के धीमे क्रियान्वयन, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी कमजोर संकेतकों तथा भाषाई एवं सांस्कृतिक संरक्षण पर भी विचार-विमर्श होगा। साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में भूमि एवं खनन से जुड़े ऐतिहासिक Samata Judgment के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को नीति निर्माण से जुड़ी संस्थाओं और सरकार के समक्ष रखा जाएगा, ताकि एससी/एसटी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और समग्र विकास को मजबूत किया जा सके।



