ओबीसी समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए अलग कॉलम जरूरी : दीपिका पांडेय सिंह
रांची : जातीय जनगणना में ओबीसी समाज की वास्तविक संख्या दर्ज करने के लिए अलग ओबीसी कॉलम शामिल करने की मांग को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से राजभवन तक पैदल मार्च किया गया। झारखंड कांग्रेस ओबीसी विभाग के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से राजभवन तक पैदल मार्च किया गया।
इस मार्च में झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बड़ी संख्या में कांग्रेसंधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने ओबीसी समाज की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राजभवन तक पैदल मार्च किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जब देश में जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो रही है, ऐसे समय में जातीय जनगणना में ओबीसी समाज के लिए अलग कॉलम शामिल नहीं किया जाना समझ से परे है। ओबीसी समाज की वास्तविक संख्या और उसकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब उनकी स्पष्ट और अलग गणना हो।
उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को उसका सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जातिगत जनगणना बेहद आवश्यक है। जनसंख्या के वास्तविक आंकड़े सामने आने के बाद ही नीतियों और योजनाओं का निर्माण अधिक प्रभावी एवं न्यायसंगत तरीके से किया जा सकता है।मंत्री ने कहा कि आदरणीय राहुल गांधी जी ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाने का काम किया है। उसी क्रम में आज झारखंड में भी कांग्रेस कार्यकर्ता इस मांग को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़ी व्यापक लड़ाई है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में इस विषय को लेकर और भी कार्यक्रम, प्रदर्शन एवं जनसंवाद आयोजित किए जाएंगे। आज की पदयात्रा इस अभियान की शुरुआत है और कांग्रेस इस मांग को उसके तार्किक परिणाम तक पहुंचाने के लिए लगातार आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब SIR (Special Intensive Revision) जैसी प्रक्रियाएं भी चल रही हैं और देश में जनगणना की शुरुआत हो रही है, तब यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी भी समाज या वर्ग को उसकी वास्तविक पहचान और संख्या दर्ज होने के अधिकार से वंचित क्यों रखा जाए।
मंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की सरना धर्म कोड की मांग और ओबीसी समाज के लिए अलग कॉलम की मांग सामाजिक पहचान एवं अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि जो समाज ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है, उसके अधिकारों और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए सही आंकड़ों का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समान अवसर और सभी वर्गों की उचित भागीदारी के लिए लगातार अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।


