कैप्टन सूरज लाट के नेतृत्व में 70 जवान बेली ब्रिज उखाड़ने में जुटे, इधर गंगा फिर बौराई
भागलपुर। भागलपुर के लिए एक तरफ विक्रमशिला सेतु का ‘महा-ऑपरेशन’ शुरू हो गया है, तो दूसरी तरफ गंगा फिर तेवर दिखाने लगी है। कैप्टन सूरज लाट के नेतृत्व में करीब 70 जवान दिनभर बेली ब्रिज को खोलने की कवायद में जुटे हुए हैं। इसी बीच विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापना कार्य के कारण वैकल्पिक आवागमन के लिए गंगा में जहाजों से फेरी सेवा शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण और स्थायी मरम्मत कार्य पर लगभग ₹99 करोड़ (विस्तृत परियोजना एवं कैबिनेट के कुल स्वीकृत पैकेज के अनुसार लगभग ₹126.26 करोड़) खर्च किए जा रहे हैं। यानी स्पष्ट है कि महज माह भर की सुविधा के लिए बेली ब्रिज के निर्माण में करीब साढ़े 26 लाख रुपये गंगा में बहा दिया गया। सेतु पर काम शुरू होने के बाद अगले करीब तीन महीने तक आवागमन प्रभावित रहने की स्थिति में भागलपुर और नवगछिया के बीच लोगों की निर्भरता गंगा की फेरी सेवा पर बढ़ गई है। फ़िलहाल आवाजाही के लिए कुल 12 जहाज चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी यात्रियों की परेशानी कम नहीं हुई है। भीड़ की शक़्ल में लोग जहाज पर चढ- उतर रहे हैं।
विक्रमशिला सेतु को लेकर स्थानीय व्यवसायियों और आम लोगों में नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। पर्व-त्योहार और लगन के मौसम में पुल बंद होने को लेकर व्यापारी वर्ग व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। स्थानीय व्यवसायियों की तल्ख टिप्पणी है कि ‘भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े विक्रमशिला सेतु पर अब महा-ऑपरेशन शुरू हो गया है।’ उनका कहना है कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर की जनता ने लगभग एक महीने तक नाव/फेरी से गंगा पार कर भारी परेशानी झेली। 7 जून से बेली ब्रिज शुरू हुआ और अब आज 1 अक्टूबर से उसे हटाकर फिर गंगा में जल परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। महागठबंधन की नेत्री अर्पणा कुमारी कहती है- मेरा सवाल है कि जब अक्टूबर से दिसंबर तक गंगा में वैकल्पिक जल परिवहन चलाकर विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन का काम किया जा सकता है, तो यही व्यवस्था मई-जून में करके स्थायी मरम्मत का काम उसी समय क्यों नहीं शुरू किया गया। जिस कामचलाऊ बेली ब्रिज का उद्घाटन बड़े तामझाम के साथ किया गया था, अब उसे सिक्किम से आई BRO की टीम खोल रही है। वहीं व्यवसायियों का तर्क है कि अगले तीन महीने तक पुल बंद रहने का सीधा असर भागलपुर की बड़ी मंडी और कारोबार पर पड़ेगा। उनका कहना है कि चंद महीनों की वैकल्पिक व्यवस्था पर खर्च होने वाली रकम और उससे पैदा होने वाली परेशानी का बोझ अंततः आम लोगों और कारोबारियों पर ही पड़ेगा। करीब 29 लाख रुपये की वैकल्पिक व्यवस्था पर खर्च होने की बात सामने आ रही है। पुल बंद होने से भागलपुर की मंडी में कारोबार प्रभावित होगा और परिवहन लागत बढ़ने से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी।
वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गंगा में कुल 12 बड़े जहाज लगाए गए हैं। सेवा शुरू होने के पहले दिन सुबह से ही भारी वाहनों, दोपहिया वाहनों और आम यात्रियों की आवाजाही जारी रही। प्रशासन ने यात्रियों और वाहनों के सुरक्षित परिचालन के लिए निर्धारित व्यवस्था लागू की है। यानी जिस भागलपुर-नवगछिया कनेक्टिविटी ने वर्षों में सड़क और पुल के सहारे रफ्तार पकड़ी थी, वह फिलहाल फिर जहाजों के भरोसे है।
पुल बंद होने की चुनौती के बीच गंगा का बढ़ता जलस्तर प्रशासन और लोगों की चिंता और बढ़ा रहा है। गंगा एक बार फिर बौराने को आतुर दिख रही है और संभावित खतरे का भय घाटों पर साफ नजर आने लगा है। भागलपुर के सभी प्रमुख घाटों पर गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर पहुंच गया है। स्थिति को देखते हुए डीएम अलंकृता पांडेय ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। विक्रमशिला सेतु के डाउनस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 31.60 मीटर के खतरे के निशान को पार कर गया है। भागलपुर में बुधवार को जलस्तर 32.87 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी बिंदु 32.68 मीटर है। वहीं इस्माईलपुर-बिवटोली में चेतावनी बिंदु 30.60 मीटर के मुकाबले बुधवार को जलस्तर 31.78 मीटर रहा।
फेरी सेवा भी चौबीस घंटे उपलब्ध नहीं रहेगी। डीएम के अनुसार जहाजों का परिचालन सुबह छह बजे से सूर्यास्त तक होगा। छोटी नावों के परिचालन को फिलहाल मंजूरी नहीं दी गई है। जलस्तर कम होने के बाद इस पर निर्णय लिया जा सकता है। इसका मतलब साफ है – रात होते ही भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन की मुश्किल और बढ़ जाएगी। प्रशासन के मुताबिक दोनों हिस्सों के बीच करीब 12 घंटे तक आवागमन प्रभावित रहेगा।
विक्रमशिला सेतु बंद होने का सबसे बड़ा असर भागलपुर-नवगछिया आवागमन पर पड़ा है। सामान्य स्थिति में करीब 14 किलोमीटर की दूरी तय कर नवगछिया पहुंचने वाले लोगों को अब वैकल्पिक सड़क मार्ग से करीब 145 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ रहा है। एक तरफ 1.26 करोड़ की लागत से पुल की मरम्मत, दूसरी तरफ उफनती गंगा और तीसरी तरफ 145 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर – भागलपुर के सामने फिलहाल यही सबसे बड़ी कनेक्टिविटी चुनौती बनकर खड़ी है।


