जल-नल योजना के चक्कर में फँसे ग्रामीण, करोड़ों खर्च के बावजूद बूंद-बूंद पानी को तरस रही जनता
खूंटी: मुरहू प्रखंड में सरकार की जल जीवन मिशन एवं जल-नल योजना को लेकर ग्रामीणों में भारी निराशा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने आरोप लगाया है कि जिस योजना से ग्रामीणों को घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का सपना दिखाया गया था, आज वही योजना कई गांवों में ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
अरुण कुमार साबू ने कहा कि वर्ष 2022 में चुनाव के दौरान उन्हें भी उम्मीद थी कि जल-नल योजना के माध्यम से गांव के प्रत्येक घर तक पानी पहुंचेगा और ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से स्थायी रूप से निजात मिलेगी। लेकिन आज जमीनी स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण चापाकल और कुओं के माध्यम से किसी तरह अपनी पेयजल की जरूरत पूरी कर लेते थे। लेकिन आज कई स्थानों पर स्थिति ऐसी हो गई है कि किलोमीटर के दायरे में एक चापाकल तक उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, जल-नल योजना के तहत लगाए गए मोटर खराब होने पर उसे चालू करने में काफी समय लग जाता है। बिजली की अनियमितता भी पेयजल आपूर्ति में बड़ी बाधा बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि गर्मी के चार महीनों में जब नदी और अन्य जलस्रोतों में पानी कम हो जाता है, तब ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। कई जगहों पर ठेकेदारों की कथित लापरवाही के कारण पाइप फट चुके हैं और पेयजल आपूर्ति बाधित है।
उप प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर पानी की टंकियों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि टंकियों के ऊपर सुरक्षा जाली तक नहीं लगी है और खुले में पानी जमा है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता और उसकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पानी के स्रोत की ही पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो केवल टंकी, पाइप और मोटर लगा देने से ग्रामीणों को स्थायी पेयजल कैसे मिलेगा।
अरुण कुमार साबू ने मांग की कि मुरहू प्रखंड की सभी 16 पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत बनी योजनाओं की जमीनी जांच कराई जाए। प्रत्येक योजना में पानी का स्रोत, पाइपलाइन, मोटर, टंकी, बिजली व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज भी अनेक ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अरुण साबू ने कहा कि खूंटी जिले में पेयजल व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उनका आरोप है कि चापाकल की मरम्मत के लिए कभी-कभी मिस्त्री तो उपलब्ध करा दिया जाता है, लेकिन पाइप या अन्य आवश्यक सामग्री के लिए ग्रामीणों को ही खर्च करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यदि विभाग के पास नियमित मरम्मत और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ता है। उन्होंने विभाग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि पिछले तीन वर्षों में मुरहू प्रखंड में पेयजल योजनाओं के रखरखाव और मरम्मत के लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई गई तथा उसका उपयोग कहां-कहां किया गया।
अरुण कुमार साबू ने कहा कि सरकार पेयजल के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये की योजनाएं चला रही है, लेकिन सवाल यह है कि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है?
उन्होंने कहा, “जिस ग्रामीण को पानी पीना है, उसकी क्या गलती है? सरकार पानी के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं और करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन अगर ग्रामीण को एक बूंद पानी भी न मिले तो ऐसी योजना का क्या लाभ?”
उन्होंने कहा कि विभाग और ठेकेदारों की जवाबदेही तय किए बिना केवल नई योजनाओं का कार्यादेश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पुरानी योजनाओं की स्थिति सुधारना और उनका नियमित रखरखाव सबसे जरूरी है।
अरुण साबू ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि मुरहू प्रखंड की सभी जल-नल योजनाओं का स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय भौतिक सत्यापन कराया जाए, खराब योजनाओं को तत्काल चालू कराया जाए, पाइपलाइन एवं मोटर की मरम्मत कराई जाए तथा जहां जलस्रोत उपलब्ध नहीं हैं वहां वैकल्पिक स्थायी जलस्रोत की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि पानी कोई राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि ग्रामीणों का मूल अधिकार और जीवन की आवश्यकता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर हर ग्रामीण के घर तक सुरक्षित और नियमित पेयजल पहुंचे।


