अंग-भंग राजनीति : दिल जदयू का,धड़कन आरजेडी की, अंग की मिट्टी में कहीं फ्रेंडली, कहीं बागी तेवर
भागलपुर। बिहार की सियासत में कौन किसका है, ये अब बताना किसी जोतिषी के बस की बात नहीं! सुल्तानगंज से कहलगांव, पीरपैंती तक, गंगा पार गोपालपुर से बिहपुर तक राजनीति ने रिश्तों, दलों और सिद्घांतों की ऐसी मिक्स-ग्राइंडर बना दी है कि पहचानना मुश्किल है कि कौन ‘दल’ का है, कौन ‘दिल’ का और कौन निर्दल है। कुल मिलाकर, अंग-भंग राजनीति, दिल जदयू का, धड़कन आरजेडी की, कहीं फ्रेंडली, कहीं बागी तेवर, अंग की मिट्टी में गड्डमड्ड दंगल। कयास के कबूतर चुप। इस स्वरुप के बाद भविष्यवाणी की खेती करने और फसल काटने वाले अभी मौन हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल।
इधर भागलपुर के जेडीयू सांसद के भाई अनुज कुमार मंडल कहलगांव से निर्दलीय बन मैदान में हैं – मतलब घर का भाई खुद बागी, और पार्टी का हाल ‘बेचारी’। अब आते हैं रिश्तेदारी की पॉलिटिक्स पर सांसद की मुहबोली भांजी अर्पणा कुमारी भी पीछे नहीं। उन्होंने वीआईपी का टिकट थाम लिया और बिहपुर में अपने मामा यानी एनडीए के उम्मीदवार कुमार शैलेन्द्र की नाक में दम कर दिया है। अब बिहपुर का चुनावी रण परिवार बनाम परिवार वाला सीरियल लग रहा है – बस डायलॉग बाकी हैं! अर्पणा कुमारी वीआईपी का दामन थाम बिहपुर से चुनावी मैदान में उतरकर भाजपा के कुमार शैलेन्द्र को कड़ी टक्कर दे रही है। यहां त्रिकोणीय मुकाबले में शैलेन्द्र फंस चुके हैं।
कहलगांव और सुल्तानगंज में तो ‘फ्रेंडली फाइट’ चल रही है – जैसे दो दोस्त एक ही लड़की को पसंद कर लें, लेकिन कहते रहें ‘हमारा झगड़ा नहीं है’। महागठबंधन के उम्मीदवार खुद में ही भिड़े पड़े हैं। इन दोनों जगहों पर आरजेडी और कांग्रेस के चेहरे एक दूसरे से आगे निकलने के लिए घनघोर मशक्कत कर रहे हैं। सुल्तानगंज में जेडीयू के सिटिंग विधायक प्रो ललित नारायण मंडल और कहलगांव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते शुभानंद मुकेश से टकराते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर महा गठबंधन के दो चेहरे एनडीए के इकलौते चेहरे को पटखनी देने में लगे हैं।
वहीं भाजपा की हालत भी किसी सास-बहू ड्रामे से कम नहीं। कहलगांव में और पीरपैंती में भी बगावत का बवाल कम नहीं। बीजेपी विधायक ललन कुमार ने टिकट कटते ही पार्टी को ‘टाटा बाय-बाय’ कर आरजेडी का दामन थाम लिया और अब आरजेडी के उम्मीदवार रामविलास पासवान के लिए वोट मांग रहे हैं, जिसके खिलाफ कल तक गरजते थे। इस खेल में ललन का खूब विरोध भी हो रहा है। अंग की राजनीति में ये यू-टर्न नहीं, पूरा फ्लिपकार्ट एक्सप्रेस है। कहलगांव के भाजपा विधायक पवन यादव तो निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। मुट्ठी भर अपने चहेतों के साथ क्षेत्र में भौकाल मचा रहे हैं।
भाजपा ने हालांकि भागलपुर सदर में वक्त रहते आधा दर्जन बागियों को मना लिया, वरना वहां भी ‘घर की लड़ाई, सीट पर तबाही’ वाला हाल होता। अब वहां कांग्रेस के अजीत शर्मा और भाजपा के रोहित पांडे आमने-सामने हैं। यानी चुनावी दंगल का फाइनल मैच तय!
गंगा पार गोपालपुर में गोपाल मंडल की बगावत ने समीकरण ऐसे बदल दिए हैं कि अब मुकाबला आर-पार नहीं, त्रिकोणीय वार बन गया है। इस स्वरुप के बाद भविष्यवाणी की खेती करने और फसल काटने वाले अभी मौन हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल।
उधर बिहपुर में सांसद की भांजी और शैलेन्द्र की ठन गई है। जन सुराज के पवन चौधरी ने भाजपा के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पवन सिटिंग विधायक के स्वजातीय हैं। आखिरी वक्त पर अगर पवन ने हवा पलट दी, तो सिटिंग विधायक के अरमान गंगा किनारे धूल फांकते दिखेंगे।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति फिर साबित कर रही है – यहां नेता बदलता है दल, जनता नहीं बदलती हल। मारी तो पब्लिक जाती है, और पिसे तो वोटर की उम्मीदें!



