एनटीपीसी में ठहाकों की बौछार, कवियों ने बांधा समां, हास्य कवि सम्मेलन बना यादगार शाम!
भागलपुर। जब मंच पर उतरे देश के मशहूर कवि, और गूंज उठी ठहाकों की ताली… तब दीप्तिनगर परिसर स्थित दुर्गा पूजा पंडाल कुछ पलों के लिए शब्दों के रंगमंच में तब्दील हो गया। मौका था – एनटीपीसी कहलगांव द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन 2025’ का, जो हिंदी पखवाड़ा समारोह की एक झिलमिलाती कड़ी के रूप में अपनी चमक छोड़ गया।
हास्य और व्यंग्य की धार से सजे इस कवि सम्मेलन में मंच संभाला देश के ख्यातिप्राप्त कवियों ने – प्रताप फौजदार की फुलझड़ियां हों या सुदीप भोला की सामाजिक नोंक-झोंक, निलोत्पल मृणाल की संवेदनशीलता हो या उपेन्द्र पांडेय की गुदगुदाती शैली — हर एक कवि ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता हंसी में डूबे भी और सोच में भी। और जब मंच पर आईं कवयित्री पद्मिनी शर्मा तो प्रेम, ताजगी और ठहराव को एक नई आवाज़ मिल गई। उनकी कविताओं ने यह दिखाया कि हास्य भी संवेदनशील हो सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्वागत भाषण के साथ हुई, जहाँ एनटीपीसी कहलगांव के परियोजना प्रमुख श्री रवींद्र पटेल ने कवियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा, साहित्य आत्मा को स्पर्श करता है, और ऐसे आयोजन हमारी भाषा और संस्कृति को नई ऊर्जा देते हैं।
इस सांस्कृतिक शाम को खास बना दिया वहाँ मौजूद एनटीपीसी कर्मियों, उनके परिवारों और स्थानीय लोगों की उत्साही उपस्थिति ने। हर चुटकुला, हर कविता पर जो तालियां गूंजीं वो सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, भाषा और भावनाओं का उत्सव था। एनटीपीसी कहलगांव का यह आयोजन मनोरंजन के साथ-साथ हिंदी साहित्य के सशक्त प्रचार-प्रसार की एक प्रभावशाली मिसाल बन गया।



