डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में नॉन वर्बल कम्युनिकेशन पर संगोष्ठी आयोजित
रांची : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सभागार में अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य विभाग द्वारा द वॉयस ऑफ साइलेंस:डिकोडिंग नॉन वर्बल कम्युनिकेशन विषय पर एक प्रेरणादायक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. पियूष बाला ने किया।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विनय भरत, विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर अंग्रेज़ी विभाग, ने गैर-मौखिक संचार की महत्ता पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “मौन की भी अपनी भाषा होती है, जो शब्दों से कहीं अधिक सच्ची और प्रभावशाली होती है।” डॉ. भरत ने बताया कि किसी भी संवाद का केवल 30 प्रतिशत अर्थ शब्दों से निकलता है, जबकि शेष 70 प्रतिशत अर्थ चेहरे के भाव, शरीर की मुद्रा, आँखों की भाषा और स्वर के उतार-चढ़ाव से व्यक्त होता है।
उन्होंने ए बी सी सूत्र” — अपीयरेंस,बॉडी लैंग्वेज और कम्युनिकेशन को प्रभावशाली व्यक्तित्व की नींव बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि “गैर-मौखिक संचार ही व्यक्ति के आत्मविश्वास, सच्चाई और संवेदनशीलता का वास्तविक परिचायक होता है।”
कार्यक्रम में विभाग की शिक्षिकाएँ डॉ. रश्मि कुमारी, सुश्री रुचिका तसकीन केरकेट्टा (जिन्होंने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया), सुश्री अदिति सिद्धांत (कार्यक्रम की संचालिका), डॉ. करिश्मा परिजात, सुश्री नीलिमा कुमारी, डॉ. सुप्रिया आनंद सहित कई अध्यापक और शोधार्थी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में लगभग 500 छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में डॉ. पियूष बाला ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संचार की शुरुआत शब्दों से नहीं, बल्कि हमारी मौन अभिव्यक्ति और संवेदना की भाषा से होती है।”



