एसएम कॉलेज में ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान
भागलपुर। सुन्दरवती महिला महाविद्यालय (एसएम कॉलेज) के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में सोमवार को ‘हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान’ विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ओड़िशा के उत्तकल विश्वविद्यालय से संबद्ध बीजेबी गवर्नमेंट ऑटोनोमस कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं भारतीय गांधी अध्ययन परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुधीर चंद्र जेना उपस्थित थे।
संविधान: विदेशी प्रभावों का मिश्रण -प्रो. जेना
अपने विस्तृत संबोधन में प्रो. जेना ने भारतीय संविधान की वास्तविकताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संविधान निर्माण के समय संविधान सभा के लगभग 70 प्रतिशत सदस्य कांग्रेस के थे, इसलिए इसे मूलतः ‘कांग्रेसी दस्तावेज’ कहना अनुचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में भारतीयता की छाप अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है, जबकि इसका ढांचा बड़े पैमाने पर भारत शासन अधिनियम 1935, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के संविधान से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन समय के साथ जिस प्रकार के व्यापक परिवर्तन आवश्यक थे, वे आज तक लागू नहीं हुए। वाजपेयी सरकार के दौरान गठित वेंकटचलैया आयोग की सिफारिशों पर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गांधीजी का संविधान क्यों नहीं अपनाया गया?
प्रो. जेना ने बताया कि गांधीजी द्वारा श्रीमन नारायण अग्रवाल के माध्यम से तैयार संविधान को संविधान सभा ने नजरअंदाज कर दिया था। उन्होंने कहा कि एक प्रभुत्वकारी समूह ने तत्कालीन परिस्थितियों में संविधान को भारतीयों पर थोप दिया, जबकि नागरिक आज भी अपने मौलिक अधिकारों को वास्तविक रूप से पाने के लिए संघर्षरत हैं।ब्यूरोक्रेसी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी संविधान की गाइडलाइन का पालन नहीं करते। नेताओं के रिश्तेदारों के प्रति उनका नरम रवैया लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा, ‘भारत में अभी भी रूल ऑफ लॉ पूरी तरह लागू नहीं है। राजनीतिक दलों के कारण लोग आज तक वार्ड सदस्य का चयन भी स्वतंत्र रूप से नहीं कर पाते।’
डीपीएसपी – राष्ट्रनिर्माण का आधार
राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए प्रो. जेना ने कहा कि यह समाजवादी, गांधीवादी व उदारवादी दर्शन का अनूठा मिश्रण है। यदि राज्यों द्वारा इन्हें ईमानदारी से लागू किया जाए तो भारत जल्दी ही एक समृद्ध और कल्याणकारी राष्ट्र बन सकता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन और संचालन
कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज की प्राचार्या प्रो. निशा झा ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन छात्राओं और शिक्षकों दोनों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं।राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराधा प्रसाद ने अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर किया तथा स्वागत भाषण भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संयोजन व संचालन आयोजन सचिव, राजनीति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर एवं टीएमबीयू के पीआरओ डॉ. दीपक कुमार दिनकर ने किया। इतिहास विभाग के डॉ. हिमांशु शेखर ने विषय प्रवेश कराया तथा धन्यवाद ज्ञापन राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनीता सिन्हा ने किया।
छात्राओं की बड़ी भागीदारी
कार्यक्रम में यूजी और पीजी की लगभग डेढ़ सौ से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। व्याख्यान के दौरान छात्राओं ने संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान प्रस्तुत किया।



