मंत्री रामदास सोरेन का ग्रामप्रधान से शिक्षा मंत्री तक का सफर..

रांची : अभी झारखंड की जनता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन की सदमा से उबरा भी नहीं था कि फिर से एक कद्दावर नेता शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन से एक और सदमा लग गया है। अगस्त महीने में झारखंड के दो दो कद्दावर नेता का निधन हो गया है। रामदास सोरेन को तीन पुत्र और एक पुत्री है। उनकी पुत्री दिल्ली में बैंक ऑफ इंडिया एन मैनेजर के पद पर कार्यरत है। दो पुत्र व्यवसाय कर रहे हैं और एक पुत्र यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन बहुत ही दयालु और सभी के बीच घुलने मिलने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने ग्राम प्रधान से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। मेहनत और संघर्ष के बाल पर उन्होंने मंत्री पद पाया था। 2005 में वे निर्दलीय चुनाव लड़े थे जिसमें उनको बहुत 35 हजार वोट मिला
रामदास सोरेन का जन्म एक जनवरी 1963 को पूर्वी सिंहभूम के घोराबांध गांव में हुई थी। जमशेदपुर के को-ऑपरेटिव कॉलेज से स्नातक सोरेन ने हमेशा सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और आदिवासी अंचलों में शिक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया। 2009 में वे पहली बार घटशीला विधासभा क्षेत्र से विधायक बने। उसके बाद 2019 और 2024 में घटशीला से लगातार अपनी जीत दर्ज करते रहे।
रामदास सोरेन 2014 के चुनाव में लक्ष्मण टुडू से हार गए थे। लेकिन चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने फील्ड नहीं छोड़ा और लगातार जनता के बीच अपनी उपस्थिति देते रहे। जनता के दुख-सुख में साथ निभाते रहे। वे झामुमो के एक कद्दावर नेता थे। 2024 में चुनाव जीतने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके कैबिनेट मंत्री बनाने पर क्षेत्र में जबरदस्त खुशी का माहौल था। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं और लोगों ने कहा था—“रामदास बाबू गरीब-गुरबा की सेवा के लिए बने हैं.
रामदास के निधन पर राज्यपाल संतोष गंगावार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन सहित कई नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की।

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