होली गई, ईद आई… लेकिन TMBU के पेंशनरों की जेब अब भी खाली
भागलपुर। एक ओर त्योहारों का मौसम बीत गया। पहले होली और अब ईद भी आ गई लेकिन तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पेंशनरों के लिए खुशियों का यह समय चिंता और इंतजार में बदल गया है। फरवरी महीने की पेंशन अब तक नहीं मिलने से सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों में फरवरी माह की पेंशन समय पर पेंशनरों के खाते में भेज दी गई, लेकिन टीएमबीयू के पेंशनरों को अब तक भुगतान नहीं हो सका है। पेंशनरों का कहना है कि सरकार और विश्वविद्यालय के बीच उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) समेत अन्य औपचारिकताओं को लेकर चल रही खींचतान का खामियाजा बेगुनाह बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष की तरह इस साल भी दिसंबर से फरवरी तक की पेंशन राशि का अनुदान राज्य सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को नहीं मिला। शिक्षा विभाग के निर्देश पर पीएल खाते से केवल दो माह की पेंशन का भुगतान किया गया, लेकिन फरवरी की पेंशन अब भी लंबित है। त्योहारों के इस दौर में पेंशन न मिलने से पेंशनरों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
पेंशनरों का कहना है कि अधिकांश सेवानिवृत्त कर्मचारी उम्रदराज हैं और लगभग सभी किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में इलाज और दवाइयों पर नियमित खर्च होता है। सबसे अधिक परेशानी चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों और फैमिली पेंशनरों को झेलनी पड़ रही है, जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है।
इस बीच विश्वविद्यालय की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पिछले करीब डेढ़ दशक से पेंशन और सेवांत लाभ के लिए मिलने वाले सरकारी अनुदान को लाभार्थियों में बांटने के बजाय फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करने की परंपरा चल रही है। नियमों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना सरकारी राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट करना और उस पर ब्याज अर्जित करना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में पेंशन और अन्य सेवांत लाभों में कटौती कर लगभग 370.85 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा हैं। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि पर मिलने वाले ब्याज का उपयोग किस कार्य में किया जा रहा है और क्या विश्वविद्यालय के पास इसका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा मौजूद है?
पेंशनरों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि माननीय कुलपति इस मामले का संज्ञान लें और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए कटौती की गई राशि जारी करें या फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर फरवरी 2026 की पेंशन और अन्य सेवांत लाभों का भुगतान अविलंब सुनिश्चित करें, ताकि बुजुर्ग पेंशनरों को राहत मिल सके।



