नीतीश की सियासत का ‘कमबैक मास्टर’ मॉडल, 26 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें भाजपा के 14, जदयू के 8, चिराग के 2 मंत्री, एक मुस्लिम चेहरा
प्रदीप विद्रोही,बिहार की राजनीति में अगर किसी नेता की पहचान ‘कमबैक किंग’ के तौर पर हुई है, तो वह हैं नीतीश कुमार। दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि बिहार की सत्ता की बाजी भले ही कई बार बदली हो, मगर ‘खेल’ पर पकड़ अब भी उन्हीं की है। 3 मार्च 2000 को महज 7 दिन की मुख्यमंत्री पारी खेलकर इस्तीफा देने वाले नीतीश ने 20 नवंबर 2025 को अपने 10वें कार्यकाल की शुरुआत कर दी। पटना का गांधी मैदान इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना, जहां उनके साथ सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने डिप्टी सीएम के रूप में शपथ ली। 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें भाजपा के 14, जदयू के 8, चिराग के 2 मंत्री, एक मुस्लिम चेहरा।
- पहली पारी: 7 दिन की सत्ता, जिस ने गढ़ा भविष्य (3 मार्च 2000)
साल 2000 के चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिला। राजनीतिक जोड़तोड़ में राज्यपाल ने समता पार्टी–भाजपा गठबंधन से सरकार बनाने को कहा और नीतीश पहली बार मुख्यमंत्री बने।लेकिन बहुमत साबित न कर पाने पर 10 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। सरकार सिर्फ 7 दिन चली – मगर यहीं से नीतीश की जिद और रणनीति की शुरुआत हुई।
- ‘सुशासन मॉडल’ की नींव (24 नवंबर 2005)
2005 में दोबारा चुनाव हुए और इस बार जदयू–भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला। नीतीश दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।इसी कार्यकाल ने उन्हें ‘सुशासन बाबू’ की पहचान दी और बिहार में विकास की नई चर्चा शुरू हुई।
- ऐतिहासिक बहुमत और फिर राजनीतिक भूचाल (26 नवंबर 2010)
2010 में जदयू – भाजपा की जोड़ी ने 243 में से 206 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया। 2013 में गठबंधन टूटा, फिर भी नीतीश सत्ता में बने रहे। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में निराशाजनक परिणाम के बाद नीतीश ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया।
- फिर वापसी और पार्टी के संकट पर नियंत्रण (22 फरवरी 2015)
मांझी और जदयू के बीच टकराव बढ़ा और समीकरण बिगड़ते दिखे। पार्टी ने दोबारा नीतीश को नेता चुना और वे चौथी बार सीएम बने।
- महागठबंधन का उभार, पहली बार तेजस्वी डिप्टी (20 नवंबर 2015)
2015 के चुनाव में जदयू – राजद – कांग्रेस गठबंधन को भारी जीत मिली। नीतीश पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी यादव पहली बार डिप्टी सीएम बने। यह गठबंधन बाद में राजनीति की सबसे नाटकीय घटनाओं का कारण बना।
- तेजस्वी विवाद और महागठबंधन की विदाई (27 जुलाई 2017)
तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, तनातनी बढ़ी और नीतीश ने इस्तीफा दे दिया। अगले ही दिन भाजपा के समर्थन से वे छठी बार मुख्यमंत्री बन गए। नीतीश का यह कदम पूरे देश की राजनीति में चौंकाने वाला मोड़ साबित हुआ।
- 2020 का चुनाव और कमजोर जदयू के साथ भी सत्ता (16 नवंबर 2020)
एनडीए को बहुमत मिल गया, लेकिन जदयू मात्र 43 सीटों पर सिमट गई। इसके बावजूद भाजपा ने नीतीश को सीएम चेहरा बनाए रखा – वे सातवीं बार मुख्यमंत्री बने।
- ‘विश्वासघात’ का आरोप और महागठबंधन में फिर वापसी (10 अगस्त 2022)
बीजेपी से रिश्ते बिगड़ते गए। नीतीश ने उन पर विश्वासघात का आरोप लगाया और गठबंधन तोड़ दिया। महागठबंधन में शामिल होकर वे आठवीं बार मुख्यमंत्री बने और तेजस्वी दोबारा डिप्टी सीएम बने।
- 2024 – दो साल में फिर पलटी राजनीति (28 जनवरी 2024)
महागठबंधन और इंडिया ब्लॉक से नाराज होकर नीतीश ने इस्तीफा दिया और एनडीए में लौट आए।
पटना राजभवन में वे नौवीं बार सीएम बने और सम्राट चौधरी–विजय सिन्हा को डिप्टी बनाया गया।
- 2025 – दो दशक की सत्ता का नया अध्याय (20 नवंबर 2025)
लगातार राजनीतिक उतार – चढ़ाव के बीच, गठबंधन बदलते हुए, आरोप – प्रत्यारोप झेलते हुए भी नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सबसे स्थायी ‘फैक्टर’ बने रहे। अब वे दसवीं बार मुख्यमंत्री हैं – एक ऐसा रिकॉर्ड जो भारतीय राजनीति में बहुत कम नेताओं के पास है।
नीतीश की राजनीति का फॉर्मूला:
गठबंधन की गणित समझने का मास्टर कौशल
सही समय पर सही मोड़ लेने की कला
कमजोर स्थिति में भी मजबूत सौदेबाजी
और हर बार वापसी की क्षमता



